
मुंबई, 29 अप्रैल . पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान समाप्त होने के साथ ही देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनावी हलचल तेज हो गई है. इसी बीच एग्जिट पोल को लेकर चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं. इस संदर्भ में ‘एक्सिस माई इंडिया’ के सीएमडी प्रदीप गुप्ता ने से बातचीत में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला.
प्रदीप गुप्ता ने कहा कि इस बार के चुनाव में महिला मतदाताओं की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है. पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्य सरकारों ने महिलाओं के बैंक खातों में सीधे आर्थिक सहायता देने की योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि महिलाएं इन योजनाओं से कितनी संतुष्ट हैं और क्या वे मौजूदा सरकारों पर अपना भरोसा दोबारा जताती हैं या नहीं.
उन्होंने बताया कि हर चुनाव में सत्ता-विरोधी (एंटी-इनकंबेंसी) और सत्ता-समर्थक (प्रो-इनकंबेंसी) लहर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, और इस बार भी यही स्थिति बनी हुई है. गुप्ता ने यह भी उल्लेख किया कि जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, वे सभी गैर-हिंदी भाषी क्षेत्र हैं, जिससे चुनावी समीकरण और भी रोचक हो जाते हैं. बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दे भी हमेशा की तरह इस बार के चुनाव में अहम रहेंगे.
पश्चिम बंगाल के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “वहां सर्वे करना इस बार एक बड़ी चुनौती साबित हुआ है. पहले चरण के दौरान ‘एक्सिस माई इंडिया’ की टीम ने पाया कि करीब 60 से 70 प्रतिशत लोग अपनी राय साझा करने को तैयार नहीं थे. राज्य में एक तरह का भय का माहौल है, जिसके कारण लोग खुलकर बात करने से बच रहे हैं. दूसरे चरण के बाद फिर से मतदाताओं के रुझान को समझने की कोशिश की जाएगी.”
प्रदीप गुप्ता ने अन्य राज्यों की स्थिति पर चर्चा करते हुए बताया कि असम में इस बार गठबंधनों में काफी बदलाव देखने को मिला है. हिमंता सरमा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार दो बार से सत्ता में है, और अब यह देखना होगा कि जनता उन पर फिर से विश्वास जताती है या नहीं. केरल में वामपंथी सरकार लगातार दूसरी बार सत्ता में है, जबकि वहां पर परंपरागत रूप से हर पांच साल में सरकार बदलने का ट्रेंड रहा है. ऐसे में वहां एंटी-इनकंबेंसी एक बड़ा फैक्टर बन सकता है. वहीं, तमिलनाडु में डीएमके की सरकार है, लेकिन इस बार अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है.
उन्होंने बताया कि पुडुचेरी जैसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश में भी सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड देखा जाता रहा है. यहां भी मुकाबला कड़ा हो सकता है. पश्चिम बंगाल में इस बार लेफ्ट और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे वोटों का बंटवारा हो सकता है और इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है.
सर्वे के दौरान आई चुनौतियों का जिक्र करते हुए गुप्ता ने कहा कि भीषण गर्मी और बंगाल में लोगों की झिझक सबसे बड़ी बाधाएं रहीं. उन्होंने बताया कि उनकी कोशिश रहती है कि हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 200 लोगों से बात की जाए, ताकि सटीक आकलन किया जा सके. ‘एक्सिस माई इंडिया’ ने अब तक 81 चुनावों में अनुमान लगाए हैं, जिनमें से 74 में उनकी भविष्यवाणी सही साबित हुई है.
अब सबकी नजर 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी है, जब यह साफ हो जाएगा कि जनता ने किस पार्टी और नेतृत्व पर अपना भरोसा जताया है.
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एससीएच/एबीएम