
नई दिल्ली, 19 मई . आधुनिक जीवनशैली में गतिशीलता जितनी बढ़ी है, शारीरिक सक्रियता उतनी ही कम हो गई है. ऐसे में अधिकांश लोग पीठ, कमर और गर्दन के दर्द से परेशान हैं. इस समस्या का प्रभावशाली समाधान अर्धचक्रासन है.
यह एक महत्वपूर्ण आसन है, जिसे करने के दौरान शरीर की आकृति अर्धचक्र के समान बन जाती है. संस्कृत में ‘अर्ध’ का अर्थ आधा और ‘चक्र’ का अर्थ पहिया होता है. इस अभ्यास में शरीर आधे पहिए के आकार में पीछे की ओर मुड़ता है.
आयुष मंत्रालय के अनुसार, अर्ध चक्रासन (हाफ व्हील पोज) एक बेहतरीन बैकबेंडिंग (पीछे की ओर झुकने वाला) योगासन है, जो रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन और फेफड़ों की कार्यप्रणाली में सुधार करने में अत्यधिक प्रभावी है.
यह आसन अग्न्याशय को उत्तेजित करता है, जिससे रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है. साथ ही, छाती और कंधों में खिंचाव होने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और श्वसन संबंधी विकारों में राहत मिलती है.
अर्ध चक्रासन तनाव कम करने और शरीर की मुद्रा को बेहतर बनाने के लिए एक उपयोगी आसन है. यह आसन शरीर के कुछ खास हिस्सों पर दबाव डालकर गर्दन और कंधों के तनाव को दूर करने में मदद करता है.
आयुष मंत्रालय इसे करने का सही तरीका भी बताता है. इसके मुताबिक, सीधे खड़े होकर पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें और हाथों को कमर पर रखें. फिर गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें. ध्यान रखें कि घुटने सीधे रहें और सिर पीछे की ओर झुका रहे. इस स्थिति में 10-15 सेकंड तक रुकें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें. इसके बाद धीरे-धीरे सांस लेते हुए प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं. इस प्रक्रिया को 3-5 बार दोहराना चाहिए.
उच्च रक्तचाप, चक्कर आने की समस्या या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को यह आसन विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए. गर्भवती महिलाओं और गंभीर स्लिप डिस्क या कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द वाले लोगों को भी इससे बचना चाहिए.
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एनएस/एएस