
नई दिल्ली, 12 सितंबर . ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन शनिवार को देश-दुनिया से आए विशेषज्ञों ने कहा कि एआई और डिजिटल नवाचार में भारत तेजी से वैश्विक एआई केंद्र के रूप में उभर रहा है और अन्य देशों के बीच तकनीकी साझेदारी की संभावनाएं काफी व्यापक हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि भारत का डिजिटल भुगतान मॉडल आज पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुका है.
न्यूज एजेंसी से बात करते हुए मिस्र के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एक्सपर्ट अहमद गमाल ने कहा कि ब्रिक्स मंच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच तकनीकी सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है.
उन्होंने से कहा कि उनके दृष्टिकोण से यह सम्मेलन विशेष रूप से भारत और मिस्र के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत शुरुआत है.
अहमद गमाल ने आगे कहा कि भारत तेजी से वैश्विक एआई केंद्र के रूप में उभर रहा है और दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी की संभावनाएं काफी व्यापक हैं. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच इस तरह का संवाद भविष्य में संयुक्त परियोजनाओं और ज्ञान-साझाकरण के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा.
अहमद गमाल ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले वर्षों में रोजगार और कार्य संस्कृति में बड़े बदलाव लाएगा. उन्होंने कहा कि दुनिया अब जनरेटिव एआई से आगे बढ़कर एजेंटिक एआई के दौर में प्रवेश कर रही है और यह तकनीक कई क्षेत्रों में उत्पादकता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकती है.
उन्होंने कहा, “एआई बहुत सारी नौकरियों की प्रकृति और कार्यप्रणाली को बदल देगा. आज दुनिया जनरेटिव एआई से आगे बढ़कर एजेंटिक एआई की ओर जा रही है. यदि सरकारें और उद्योग क्षेत्र इन तकनीकों का प्रभावी उपयोग करते हैं, तो इससे उनकी उत्पादकता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा.”
अहमद गमाल ने से आगे कहा, “ब्रिक्स शिखर सम्मेलन उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाने का प्रभावी मंच है. यह सम्मेलन सदस्य देशों के नेताओं को संवाद का अवसर देता है, जिससे नवाचार, तकनीकी विकास और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलती है.”
उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव से बदल रही है और ब्रिक्स देशों के लिए यह आवश्यक है कि वे एक-दूसरे के अनुभवों से सीखें और तकनीकी सहयोग को मजबूत करें. उनके अनुसार, इससे नवाचार का लाभ पूरे ब्रिक्स समुदाय तक पहुंचाया जा सकता है.
इस बीच, ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के प्रमुख आंद्रे मिखायलिशिन ने से बातचीत में कहा कि ब्रिक्स पे का उद्देश्य सदस्य देशों की राष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ना है.
उन्होंने कहा, “ब्रिक्स पे विभिन्न देशों की भुगतान प्रणालियों के बीच एक पुल का काम करता है, जिससे यात्रियों और कंपनियों को अपने-अपने देशों की भुगतान व्यवस्था का उपयोग करते हुए लेनदेन करने की सुविधा मिल सकती है. यह एक ऐसा ढांचा है जो अलग-अलग देशों की भुगतान प्रणालियों को एक मंच पर लाता है.”
उन्होंने कहा कि यह पहल सदस्य देशों के बीच व्यापार और वित्तीय संपर्क को और अधिक सुगम बना सकती है.
इसके साथ ही, ब्रिक्स पे इंडिया के प्रमुख डॉ. पवन जोश ने से बातचीत में कहा कि भारत और रूस के संबंधों को ऐतिहासिक और भरोसे पर आधारित बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है.
उन्होंने कहा, “रक्षा क्षेत्र की बात करें तो रूस के साथ हमारा संबंध बेहद विशेष और ऐतिहासिक है. भारत और रूस एक-दूसरे पर उसी प्रकार भरोसा करते हैं जैसे दो भाई करते हैं. ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के हमारे लक्ष्य को हासिल करने में रूस महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है.”
डॉ. जोश ने आगे कहा कि भारत ने विदेशी तकनीकों को समझकर उन्हें स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकसित किया है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण यूपीआई है. उन्होंने बताया कि भारत का डिजिटल भुगतान मॉडल आज पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुका है.
डॉ. पवन जोश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनका “वसुधैव कुटुम्बकम” का दृष्टिकोण और ब्रिक्स का मूल उद्देश्य काफी हद तक एक समान है.
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री का विजन है कि पूरी दुनिया एक परिवार है और ब्रिक्स का दर्शन भी यही है. ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व करने वाला यह मंच सहयोग, साझेदारी और साझा विकास के सिद्धांत पर काम करता है. सम्मेलन के दौरान जिन समझौतों और चर्चाओं को आगे बढ़ाया गया, उनका उद्देश्य भी यही था कि सदस्य देश मिलकर आगे बढ़ें.”
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डीबीपी