हार्मोनल बदलाव बिगाड़ सकते हैं चेहरे की रंगत, पीरियड्स से पहले ऐसे बढ़ता है एक्ने का खतरा

नई दिल्ली, 1 जुलाई . महिलाओं व युवतियों के पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले चेहरे पर अचानक पिंपल्स निकलना परेशानी की वजह बन जाती है. अक्सर ऐसा होता है कि त्वचा ठीक लग रही होती है लेकिन अचानक चेहरे पर दाने उभर आते हैं. लोग इसे गलत स्किन केयर या साफ-सफाई की कमी मानते हैं. हालांकि त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी असली वजह शरीर के अंदर होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं.

पीरियड्स का पूरा चक्र लगभग 28 दिनों का माना जाता है और इस दौरान शरीर में कई हार्मोन उतार-चढ़ाव से गुजरते हैं. शुरुआत में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ता है, जो त्वचा को साफ और संतुलित रखता है. जैसे-जैसे चक्र आगे बढ़ता है, प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ने लगता है, जो शरीर को अगले चरण के लिए तैयार करता है. लेकिन पीरियड्स के करीब आते-आते इन दोनों हार्मोन्स में गिरावट आने लगती है, और इस दौरान टेस्टोस्टेरोन का प्रभाव अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई देने लगता है. यही असंतुलन पिंपल्स की समस्या को बढ़ा देता है.

मेडिकल रिसर्च के अनुसार, प्रोजेस्टेरोन का बढ़ा हुआ स्तर त्वचा की ऑयल ग्लैंड्स को ज्यादा सक्रिय कर देता है. इससे त्वचा में सीबम नाम का प्राकृतिक तेल ज्यादा मात्रा में बनने लगता है. सामान्य स्थिति में यह तेल त्वचा को मुलायम और सुरक्षित रखता है, लेकिन जब इसका उत्पादन जरूरत से ज्यादा होता है, तो यह पोर्स को बंद करने लगता है. इसके साथ ही त्वचा में हल्की सूजन भी आ सकती है, जिससे तेल बाहर नहीं निकल पाता और पिंपल्स बनने की शुरुआत होती है.

जैसे ही टेस्टोस्टेरोन का प्रभाव बढ़ता है, यह स्थिति और भी तेज हो जाती है. अतिरिक्त तेल जब धूल, गंदगी और मृत त्वचा कोशिकाओं के साथ मिल जाता है, तो छिद्र पूरी तरह बंद हो सकते हैं. बंद छिद्रों में बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं, जिससे सूजन और संक्रमण की स्थिति बनती है. यही कारण है कि कई महिलाओं को इस दौरान ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स और लाल दाने तक हो जाते हैं. सबसे ज्यादा असर ठुड्डी और जॉलाइन जैसे हिस्सों पर देखा जाता है, जिसे डॉक्टर हार्मोनल एक्ने भी कहते हैं.

त्वचा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या पूरी तरह बाहरी नहीं बल्कि अंदरूनी हार्मोनल सिस्टम से जुड़ी होती है. इसलिए सिर्फ क्रीम या फेसवॉश बदलने से हमेशा समाधान नहीं मिलता. कई मामलों में शरीर का मेटाबॉलिज्म, तनाव, नींद की कमी और खानपान भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं क्योंकि ये सभी चीजें हार्मोन बैलेंस को प्रभावित करती हैं.

कुछ सरल आदतों से इस स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. चेहरे की नियमित सफाई करना, त्वचा को ज्यादा छूने से बचना, और मोबाइल स्क्रीन को साफ रखना बैक्टीरिया के फैलाव को कम कर सकता है. इसके अलावा, धूम्रपान और अत्यधिक ऑयली फूड से दूरी बनाना भी मददगार माना जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि शरीर का संतुलित वजन बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि ज्यादा वजन हार्मोनल असंतुलन को और बढ़ा सकता है.

पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, जिंक, ओमेगा-3 फैटी एसिड, और विटामिन ए, सी, डी और ई जैसे पोषक तत्व त्वचा के स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाते हैं. ये तत्व शरीर में सूजन को कम करने और स्किन रिपेयर में मदद करते हैं. सीफूड, नट्स, हरी सब्जियां, दूध से बने उत्पाद और फल एक संतुलित आहार का हिस्सा होने चाहिए.

पीके/पीएम