
नई दिल्ली, 3 जुलाई . चिराग शेट्टी की गिनती भारत के होनहार बैडमिंटन खिलाड़ियों में की जाती है. महज 7 साल की उम्र में चिराग को इस खेल से लगाव हो गया था. हालांकि, सिंगल्स में चिराग के हाथ लगातार नाकाम लगी, लेकिन 2016 में कोच के एक फैसले ने उनके करियर और जिंदगी को पलटकर रख दिया.
चिराग का जन्म 4 जुलाई, 1997 को मुंबई के मलाड में हुआ. बचपन से ही चिराग को बैडमिंटन खेलने का शौक था. जल्द ही उन्होंने इस खेल में करियर बनाने का फैसला कर लिया. इस खेल को करीब से जानने और बारीकियों को सीखने के लिए उन्होंने गोरेगांव स्पोर्ट्स क्लब में स्थित उदय पवार बैडमिंटन अकादमी में दाखिला लिया. इसके थोड़े समय बाद ही वह मुंबई से हैदराबाद शिफ्ट हो गए और उन्होंने पुलेला गोपीचंद अकादमी में ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया.
हालांकि,चिराग को शुरुआती करियर में सिंगल्स में कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी. जूनियर इंटरनेशनल सर्किट में उन्होंने एमआर अर्जुन के साथ मिलकर जोड़ी बनाई और दमदार किया. मगर चिराग की कामयाबी का सफर साल 2016 में कोच किम टैन हेर के एक फैसले के बाद शुरू हुआ. कोच ने चिराग और सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी की जोड़ी बनाई. इस जोड़ी ने जल्द ही डबल्स में एक के बाद एक मुकाम हासिल करना शुरू कर दिया. साथ खेलते हुए चिराग और सात्विक दोनों का खेल डबल्स गेम में निखकर सामने आया.
नेशनल के साथ-साथ इंटरनेशनल लेवल पर भी चिराग ने सात्विक के साथ मिलकर कई बड़ी उपलब्धियों को अपने नाम किया. चिराग-सात्विक की जोड़ी ने साल 2019 में थाईलैंड ओपन का खिताब जीतकर इतिहास रचा. इसके साथ ही उन्होंने सिंगापुर ओपन, इंडोनेशिया ओपन सुर 1000 और कोरिया ओपन जैसे बड़े टूर्नामेंट को भी अपने नाम किया.
चिराग के करियर की सबसे बड़ी कामयाबी साल 2022 और 2023 में आई. 2022 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में चिराग ने सात्विक के साथ मिलकर स्वर्ण पदक को अपने नाम किया. वहीं, 2023 के एशियाई खेलों में भी चिराग-सात्विक का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला. भारतीय जोड़ी ने यहां भी स्वर्ण पदक जीता. चिराग सात्विक संग विश्व चैंपियनशिप में दो बार कांस्य पदक जीतने में भी सफल रहे. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि यह जोड़ी विश्व रैंकिंग में दुनिया की नंबर एक जोड़ी भी बनी. सात्विक को बैडमिंटन के खेल में अहम योगदान के लिए चिराग को साल 2020 में ‘अर्जुन पुरस्कार’ से नवाजा गया. वहीं, 2023 में उन्हें ‘मेजर ध्यानचंद खेल रत्न’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.
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एसएम/पीएम