
पटना, 1 अगस्त . जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय महासचिव श्याम राजक ने कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें प्रमुख रूप से बिहार में छात्रों के विरोध प्रदर्शन, राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर पप्पू यादव की ओर से किया गया प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस की तथ्य जांच समिति शामिल है. उन्होंने समाचार एजेंसी से बातचीत में इन सभी मुद्दों पर अपनी बातें रखीं.
उन्होंने बिहार छात्रों के संग विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ हुई बर्बरता का जिक्र करते हुए कहा कि एक दफा इंदिरा गांधी के शासनकाल को याद करना होगा. उन्हें यह याद करना होगा कि कैसे इंदिरा गांधी ने अपने शासनकाल में लोगों पर अत्याचार किया. उन्हें निशाने पर लिया है. इसके बाद कांग्रेस के लोगों को वहां पर जाकर यह पता लगाना चाहिए कि किसके साथ कितना अत्याचार हुआ है. इससे पहले कांग्रेस को यह पता लगाना होगा कि क्या उनकी नैतिकता उन्हें वहां जाने की इजाजत देती है. इसके बाद उसे किसी नतीजे पर पहुंचा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस की ओर से किसी भी प्रकार का कदम उठाया जाता है, तो मैं उसका स्वागत करता हूं. निश्चित तौर पर कांग्रेस एक विपक्षी पार्टी है. हम नहीं रोकेंगे. कांग्रेस को मेरा एक सुझाव रहेगा कि वो किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले जरा इमरजेंसी के दौरान की गई बर्बरता को याद करें. इसके बाद कोई ठोस फैसला ले. कांग्रेस को यह पता होना चाहिए कि किस तरह उनके शासनकाल में हम लोगों को प्रताड़ित किया गया था. हमें मारने की कोशिश की गई थी. मैं भी मर ही जाता. वो तो शुक्र है कि मैं बच गया. लिहाजा, कुल मिलाकर, मुद्दा यही है कि कांग्रेस को किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले जहा अपने गिरेबान में भी झांक कर देख लेना चाहिए.
वहीं, विपक्षी दल मौजूदा समय में राम मंदिर चढ़ावा विवाद का जिक्र करके केंद्र सरकार को घेर रहे हैं. कल संसद के बाहर पप्पू यादव ने भी अनोखे अंदाज में राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर प्रतीकात्मक रूप से विरोध किया. जिसकी चर्चा चौतरफा देखने को मिल रही है. इस पर भी राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने प्रतिक्रिया दी. उनके मुताबिक, आज की तारीख में कांग्रेस की स्थिति ऐसी बन चुकी है कि उसके पास कोई मुद्दा नहीं बचा है. कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों को यह समझ नहीं आ रहा है कि कैसे केंद्र सरकार को घेरने का काम करें. कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों को कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है. इन लोगों को सबसे पहले अपने दिल को बदलनना होगा. इन लोगों को अब सिर्फ गरीबी की बात नहीं करनी होगी. इससे कुछ प्राप्त होने वाला नहीं है. इन लोगों को जरा गरीबी के दर्द एहसास होना चाहिए.
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एसएचके/पीएम