भगत सिंह से मंगल पांडे तक, इन फिल्मों में दिखा देश के लिए लड़ने वाले क्रांतिकारियों का जुनून

मुंबई, 15 अगस्त . बॉलीवुड ने आजादी की लड़ाई लड़ने वाले क्रांतिकारी वीरों को भी पर्दे पर उतारा है, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के सामने झुकने से इनकार कर दिया था. ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ और ‘मंगल पांडे: द राइजिंग’ जैसी फिल्मों में क्रांति की चिंगारी नजर आती है.

इनके अलावा, ‘मणिकर्णिका’ में रानी लक्ष्मीबाई की तलवार है, तो ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटेन हीरो’ में आजाद हिंद फौज खड़ी करने का जुनून. इन फिल्मों में आजादी की लड़ाई का इतिहास नहीं, बल्कि उन वीरों के संघर्ष और बलिदान की कहानी है.

द लीजेंड ऑफ भगत सिंह : राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी 2002 की ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ में अजय देवगन ने शहीद भगत सिंह का किरदार निभाया था. फिल्म में सुशांत सिंह और डी. संतोष ने सुखदेव और राजगुरु का किरदार निभाया. कहानी भगत सिंह के बचपन से शुरू होकर उनके क्रांतिकारी जीवन, अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष और फांसी तक पहुंचती है. फिल्म में भगत सिंह की बहादुरी, देश की आजादी के लिए उनका राजगुरु और सुखदेव के साथ बलिदान का सबसे भावुक सीन शामिल है.

मंगल पांडे: द राइजिंग- केतन मेहता की ‘मंगल पांडे: द राइजिंग’ में आमिर खान ने 1857 के विद्रोह के शामिल मंगल पांडे का किरदार निभाया था. फिल्म में रानी मुखर्जी, अमीषा पटेल और टोबी स्टीफंस भी अहम भूमिकाओं में नजर आए. कहानी उस दौर की है, जब ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय सैनिक अंग्रेजी हुकूमत की नीतियों से परेशान थे. नए कारतूसों को लेकर फैली खबर के बाद मंगल पांडे का गुस्सा सामने आता है और उनका विरोध धीरे-धीरे बड़े विद्रोह का हिस्सा बन जाता है. वह अंग्रेजों के सामने झुकने के बजाय विरोध का रास्ता चुनते है.

मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी- कंगना रनौत की ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ 1857 की क्रांति की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की कहानी है. कंगना ने रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका निभाने के साथ फिल्म का निर्देशन भी किया था. फिल्म में अंकिता लोखंडे, अतुल कुलकर्णी और जीशु सेनगुप्ता भी अहम भूमिकाओं में थे. कहानी मणिकर्णिका के बचपन से शुरू होकर झांसी की रानी बनने और अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध लड़ने तक जाती है. पति की मौत के बाद अंग्रेज जब झांसी पर कब्जे की कोशिश करते हैं, तो रानी लक्ष्मीबाई अपनी सेना की कमान संभाल लेती हैं. फिल्म में उनका युद्ध कौशल, साहस और झांसी को बचाने का संघर्ष प्रमुखता से दिखाया गया है.

सरदार : केतन मेहता की 1993 में आई ‘सरदार’ में परेश रावल ने सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका निभाई थी. यह फिल्म आजादी के बाद देश को एकजुट करने में सरदार पटेल की भूमिका पर केंद्रित है. कहानी उस दौर की है, जब भारत के सामने अलग-अलग रियासतों को एक साथ लाने की बड़ी चुनौती थी. फिल्म में पटेल की राजनीतिक समझ, दृढ़ इच्छाशक्ति और कूटनीति को दिखाया गया है.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटेन हीरो- श्याम बेनेगल की इस फिल्म में सचिन खेडेकर ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का किरदार निभाया था. फिल्म नेताजी के जीवन के उस दौर पर केंद्रित है, जब उन्होंने भारत से बाहर रहकर आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाने की कोशिश की. कहानी में आजाद हिंद फौज के गठन और अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष की उनकी रणनीति दिखाई गई. नेताजी का मानना था कि अंग्रेजी हुकूमत को हटाने के लिए सिर्फ बातचीत काफी नहीं है. फिल्म उनके इसी विचार और देश को आजाद कराने के जुनून को सामने लाती है.

गांधी : रिचर्ड एटनबरो की 1982 में आई ‘गांधी’ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित फिल्म रही. इसमें बेन किंग्सले ने महात्मा गांधी का किरदार निभाया था. फिल्म गांधी के दक्षिण अफ्रीका के दिनों से शुरू होकर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका को दिखाती है. इसमें सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के जरिए अंग्रेजी शासन का विरोध करने की उनकी रणनीति दिखाई गई है, जिसमें हथियारों के बजाय अहिंसक आंदोलन को आजादी का हथियार बनाया गया.

पीके/एसके