
भागलपुर/मुंगेर, 16 अगस्त . श्रावणी मेला 2026 में बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा पर निकले लाखों कांवरियों के लिए बिहार सरकार की पहल ‘जीविका दीदी की रसोई’ राहत और भरोसे का केंद्र बन रही है. लंबी और कठिन कांवर यात्रा के बीच श्रद्धालुओं को यहां स्वच्छ, सात्विक, पौष्टिक और उचित मूल्य पर घरेलू स्वाद का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है.
खास बात यह है कि इन रसोइयों का संचालन जीविका समूहों से जुड़ी महिलाएं स्वयं कर रही हैं. इससे कांवरियों को भोजन की सुविधा मिलने के साथ जीविका दीदियों को रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर भी मिल रहा है. मुंगेर जिले से गुजरने वाले करीब 26 किलोमीटर लंबे कच्ची कांवरिया पथ पर इस बार सात स्थानों पर ‘जीविका दीदी की रसोई’ शुरू की गई है. सातों रसोइयों को टेंट सिटी के बाहर स्थापित किया गया है, ताकि यात्रा के दौरान कांवरियों को आसानी से भोजन मिल सके.
यहां श्रद्धालुओं को भोजन के साथ दूध, फल, पेयजल और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है. श्रावणी मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर पैदल रवाना होते हैं. इस कठिन यात्रा में शुद्ध और सात्विक भोजन श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की ओर से जीविका समूह की महिलाओं को रसोई संचालन की जिम्मेदारी दी गई है.
जीविका दीदी बेबी ने बताया कि रसोई में कांवरियों के लिए ताजा और सात्विक भोजन तैयार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सेवा करना उनके लिए केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि बाबा के भक्तों की सेवा करने का सौभाग्य है. वह चाहती हैं कि कांवरिया यहां से भोजन करने के बाद संतुष्ट होकर आगे की यात्रा पर रवाना हों. रसोई में भोजन तैयार करने से लेकर परोसने तक स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है. जीविका दीदियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से निर्धारित उचित दर पर ही भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को गुणवत्तापूर्ण भोजन के लिए अधिक कीमत न चुकानी पड़े.
जीविका दीदी राजनन्दिनी देवी ने कहा कि कांवरियों को स्वच्छ और स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि लंबी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को घर जैसा भोजन मिल सके, यही उनकी कोशिश है. उचित दर पर भोजन उपलब्ध कराकर उनकी यात्रा को थोड़ा और आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है. जीविका दीदियों को सामुदायिक रसोई और भोजन प्रबंधन का पहले से अनुभव रहा है. बिहार के कई सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के लिए भोजन उपलब्ध कराने में जीविका दीदियां अपनी जिम्मेदारी सफलतापूर्वक निभा चुकी हैं. अब इसी अनुभव का लाभ श्रावणी मेले में कांवरियों को मिल रहा है.
मुंगेर के अलावा बांका और भागलपुर में भी ‘दीदी की रसोई’ श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सुविधा बनकर सामने आई है. बांका जिले में तीन दीदी की रसोई संचालित की जा रही हैं और अब तक यहां आठ लाख रुपये से अधिक का कारोबार किया जा चुका है. वहीं भागलपुर जिले में कांवरिया पथ के करीब 11 किलोमीटर क्षेत्र में तीन दीदी की रसोई संचालित हैं. भागलपुर में अब तक करीब 12 लाख रुपये का कारोबार जीविका दीदियों द्वारा किया गया है. कांवरिया विशेश्वर ने बताया कि लंबी पैदल यात्रा के बीच इस तरह की रसोई से काफी सुविधा मिल रही है.
उन्होंने कहा कि यहां भोजन साफ-सुथरा, स्वादिष्ट और पूरी तरह सात्विक है. सबसे अच्छी बात यह है कि भोजन की कीमत भी उचित है, जिससे कांवरियों को राहत मिल रही है. वहीं, एक अन्य कांवरिया ने कहा कि यात्रा के दौरान अच्छे और शुद्ध भोजन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. ‘जीविका दीदी की रसोई’ में घर जैसा भोजन मिल रहा है. इससे न केवल भूख मिट रही है, बल्कि आगे की यात्रा के लिए भी ऊर्जा मिल रही है.
श्रावणी मेले में प्रशासन जहां सुरक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने में जुटा है, वहीं ‘जीविका दीदी की रसोई’ सेवा और महिला सशक्तीकरण का उदाहरण बन रही है. शुद्ध भोजन, उचित मूल्य और सेवा भाव के साथ संचालित ये रसोइयां कांवरियों की यात्रा को सहज और सुखद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. साथ ही, इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत होने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिल रहा है. इस तरह बाबा के भक्तों की सेवा के साथ ‘जीविका दीदी की रसोई’ श्रावणी मेले में भोजन, रोजगार और सेवा- तीनों का संगम बनकर उभर रही है.
–
एमएनपी/एएस