तंबाकू उत्पादों के सरोगेट विज्ञापनों को भ्रामक मानकर कार्रवाई हो तय : विक्रम पचपुते

मुंबई, 18 अगस्त . भाजपा विधायक विक्रम बबनराव पचपुते ने पान मसाला, फ्लेवर्ड सुपारी और तंबाकू उत्पादों के विज्ञापनों में सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में फ्लेवर्ड तंबाकू, फ्लेवर्ड सुपारी और गुटखा प्रतिबंधित होने के बावजूद अलग-अलग ब्रांडों के विज्ञापन दिखाई देते हैं. उन्होंने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई), केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है.

पचपुते ने से बातचीत में कहा कि उन्होंने सबसे पहले महाराष्ट्र विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था. जब राज्य में इन उत्पादों पर प्रतिबंध है, तो उनसे मिलते-जुलते या दूसरे नामों से चलने वाले ब्रांडों के विज्ञापन किस तरह प्रसारित हो सकते हैं, इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि विधानसभा में उन्हें जवाब मिला था कि ऐसे विज्ञापनों को ‘सरोगेटेड एडवर्टाइजमेंट’ के तौर पर देखा जाता है और मौजूदा प्रावधानों के तहत सीधे कार्रवाई मुश्किल है.

तुकाराम मुंढे की ओर से कुछ अभिनेताओं को नोटिस जारी किए जाने को लेकर पचपुते ने कहा कि केवल नोटिस जारी करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. यदि इन्हें मौजूदा कानून के तहत सरोगेटेड विज्ञापन माना जाता है, तो संबंधित सेलिब्रिटी कानूनी रास्ते से राहत हासिल कर सकते हैं. इसी वजह से मैंने एफएसएसएआई को पत्र लिखकर पूरे मामले को नए तरीके से देखने की मांग की है. एफएसएसएआई के अलावा केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी पत्र भेजा गया है.

भाजपा विधायक का कहना है कि ऐसे विज्ञापनों को केवल ‘सरोगेटेड ऐड’ के रूप में नहीं, बल्कि ‘मिसलीडिंग ऐड’ यानी भ्रामक विज्ञापन के तौर पर भी देखा जाना चाहिए. इस पर प्रभावी नियमन जरूरी है. अभिनेता, खिलाड़ी और बड़े इन्फ्लुएंसर्स युवाओं के लिए प्रेरणा-स्रोत हैं. ऐसे में यदि इन्हीं चेहरों के माध्यम से किसी विवादित या स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह उत्पाद से जुड़े ब्रांड का प्रचार किया जाता है, तो युवाओं के गलत दिशा में जाने का खतरा हो सकता है. सेलिब्रिटी और इन्फ्लुएंसर्स की भी सामाजिक जिम्मेदारी है और उन्हें ऐसे विज्ञापनों में काम करने से बचना चाहिए.

पचपुते ने कहा कि यह मुद्दा जनहित से जुड़ा है और इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने विपक्ष से भी इस विषय को उठाने की अपील की. उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष भी इस मुद्दे पर आगे आता है और सरकार के साथ मिलकर कानून को मजबूत करने की दिशा में काम करता है तो इससे निश्चित तौर पर सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं. मैंने केवल राज्य स्तर के एफडीए या संबंधित विभाग तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि एफएसएसएआई और केंद्र सरकार के संबंधित संस्थानों को भी पत्र लिखा है.

उन्होंने कहा कि समय के साथ भारत की प्राथमिकताएं भी बदली हैं. पहले खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब देश उस स्थिति से आगे निकल चुका है. वर्तमान समय में फूड सेफ्टी ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दा है और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों को उसी के अनुरूप मजबूत किया जाना चाहिए. पुणे की एक मिठाई की दुकान को मुआवजा देने के हाई कोर्ट के निर्देश से जुड़े सवाल पर भाजपा विधायक ने न्यायपालिका और प्रशासन के बीच संतुलन की जरूरत पर जोर दिया.

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति या संस्था काम करती है, उससे गलती की संभावना भी रहती है. यदि 100 काम किए जा रहे हैं और उनमें से एक में गलती हो जाती है और अदालत उसकी आलोचना करती है, तो साथ ही उन 99 अच्छे कार्यों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. यदि कानूनी और सरकारी अधिकारी हर फैसले को लेकर लगातार आलोचना के दबाव में रहेंगे, तो सरकार और प्रशासन प्रभावी ढंग से काम कैसे कर पाएंगे. सरकार और प्रशासन को मिलकर काम करना चाहिए और न्यायपालिका की भूमिका यह सुनिश्चित करने की है कि व्यवस्था कानून के मुताबिक सही तरीके से संचालित हो.

‘वंदे मातरम’ को लेकर उठ रहे विवाद पर भी विक्रम पचपुते ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ कोई नई बात नहीं है और यह लंबे समय से देश के सार्वजनिक जीवन का हिस्सा रहा है. उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी व्यक्ति या समूह को ‘वंदे मातरम’ से आपत्ति थी, तो इतने वर्षों तक आवाज क्यों नहीं उठाई गई और अब इस मुद्दे पर आपत्ति क्यों जताई जा रही है? यदि किसी को किसी विषय पर आपत्ति है, तो उसके लिए कानून और विधायी प्रक्रिया मौजूद है.

पीएसके/एबीएम