सर्किट हाउस परिसर में नमाज पढ़ना सपा नेता को पड़ा भारी, एफआईआर दर्ज

मुरादाबाद, 5 सितंबर . मुरादाबाद में सरकारी सर्किट हाउस परिसर में नमाज पढ़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष हाजी मोहम्मद उस्मान के खिलाफ मझौला थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 285 और 292 के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने मामले की जांच उपनिरीक्षक सौरभ कुमार को सौंपी है.

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली रोड स्थित सरकारी सर्किट हाउस परिसर में हाजी मोहम्मद उस्मान के नमाज पढ़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था. इसके बाद सर्किट हाउस प्रभारी एवं लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता की शिकायत पर मझौला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया. एफआईआर में घटना तीन सितंबर 2026 की बताई गई है, जबकि पुलिस को सूचना चार सितंबर की रात 10:21 बजे प्राप्त हुई.

हाजी मोहम्मद उस्मान बिलारी से सपा विधायक मोहम्मद फईम के चाचा बताए जाते हैं. वह इससे पहले भी राजनीतिक बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं. वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान बिलारी में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की सभा के मंच से कथित आपत्तिजनक बयानबाजी को लेकर भी उनके खिलाफ आचार संहिता से जुड़ा मामला दर्ज होने का दावा किया जाता रहा है.

हालांकि, मौजूदा मामले में पुलिस की कार्रवाई सर्किट हाउस परिसर में नमाज पढ़ने के वीडियो और शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर पर केंद्रित है. पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि घटना 3 सितंबर की है. उस दिन विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव मुरादाबाद के सर्किट हाउस पहुंचे थे, जहां उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी.

इसी दौरान समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष और बिलारी विधानसभा क्षेत्र से पार्टी विधायक हाजी मोहम्मद फहीम के चचा हाजी मोहम्मद उस्मान भी सर्किट हाउस पहुंचे थे. आरोप है कि हाजी मोहम्मद उस्मान ने सर्किट हाउस परिसर में अपनी गाड़ी खड़ी कराई और उसके पीछे खड़े होकर नमाज अदा की. इसी दौरान नमाज पढ़ते हुए उनका वीडियो बनाया गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गया.

वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आया. बाद में वीडियो को फेसबुक से हटाए जाने की बात भी सामने आई. पुलिस अब पूरे प्रकरण की पड़ताल कर रही है. जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वीडियो किसने बनाया, उसे सोशल मीडिया पर किसके माध्यम से प्रसारित किया गया और सरकारी परिसर में नमाज पढ़ने की परिस्थितियां क्या थीं.

विकेटी/एएस