ब्रिक्स 2026 में दो दिन तक हुई चर्चा से एक्शन प्लान बनाने में मिली मदद : इंडस्ट्री

नई दिल्ली, 13 सितंबर . ब्रिक्स 2026 में दो दिन तक हुई चर्चा से हमें ऐसा एक्शन प्लान बनाने में मदद मिली है, जिससे आज के उथल-पुथल भरे दौर में रिस्क को कम और एसेट एवं लिक्विडिटी के बंटवारे में गवर्नेंस के स्टैंडर्ड्स को बेहतर किया जा सकता है. यह बयान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आए इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने दिया.

ब्रिक्स 2026 के साइडलाइन में समाचार एजेंसी से बातचीत में हांगकांग की कंपनी फिड्यूशरी के को-फाउंडर और सीईओ निकोलस एराकोस सिम ने कहा, “मेरे लिए ब्रिक्स का अनुभव बहुत ही फायदेमंद रहा है. कैपिटल मार्केट के लिए आज का दौर बहुत उतार-चढ़ाव वाला है, इसलिए हम यह कोशिश कर रहे हैं कि रिस्क को कैसे कम किया जाए और साथ ही एसेट और लिक्विडिटी के बंटवारे में गवर्नेंस के स्टैंडर्ड्स को कैसे बेहतर बनाया जाए. इन दो दिनों में हुई बातचीत से हमें इस पर एक्शन प्लान बनाने में बहुत मदद मिली है.”

वहीं, रोजर्स कैपिटल कंसल्टिंग के प्रेसिडेंट और सीईओ और कम्युनिटी लीडर्स ऑफ अमेरिका के बोर्ड मेंबर चिप रोज ने ब्रिक्स पर कहा कि यहां केवल चर्चा नहीं हुई कि क्या हो सकता है, बल्कि इसे कैसे हकीकत में बदला जाए, इस पर बातचीत की गई है.

समाचार एजेंसी से बातचीत में रोज ने कहा, “इस इवेंट में मेरा अनुभव बहुत शानदार रहा है. यहां बहुत से समझदार लोग हैं जो असल में समाधान का हिस्सा हैं. वे सिर्फ बैठकर यह बात नहीं कर रहे कि क्या हो सकता है, बल्कि इस पर चर्चा कर रहे हैं कि इसे हकीकत में बदलने के लिए वे क्या कर रहे हैं. चाहे वे फाइनेंस, टेक्नोलॉजी या इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र से जुड़े लोग हों, वे सभी एक ही मकसद के लिए यहां आए हैं और वह यह है कि दुनिया भर में आसान फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की जो सुविधा हमें मिली है, उसे और बेहतर और ज्यादा खुला बनाना, ताकि दुनिया में कहीं भी कोई भी कंज्यूमर इसका इस्तेमाल कर सके.”

वहीं, आईब्रिक्स 2026 के को-कन्वेनर और एफआईसीसीआई, तमिलनाडु के को-चेयर भूपेश नागराजन कहा, “हम बहुत खुश हैं क्योंकि इस साल भारत, ब्रिक्स कॉन्फ्रेंस की अगुवाई कर रहा है और इसकी अध्यक्षता कर रहा है. दुनिया की 70 प्रतिशत आबादी ब्रिक्स और सहयोगी देशों में रहती है, और दुनिया की 60 प्रतिशत अर्थव्यवस्था भी इन्हीं ब्रिक्स देशों और सहयोगियों में केंद्रित है. इस कारण आने वाले समय में पॉलिसी से जुड़े फैसलों में बदलाव करना बहुत जरूरी है. भारत इसकी अगुवाई कर रहा है और सभी नेता यहां मौजूद हैं. वे सभी पॉलिसी बनाने वाले हैं. वे अपने-अपने देशों और हमारे देश के लिए अच्छा काम कर रहे हैं.”

एबीएस