पीएम स्वनिधि योजना से बदल रही रेहड़ी-पटरी वालों की जिंदगी, लाभार्थियों ने कहा-स्वनिधि ने बनाया आत्मनिर्भर

नई दिल्ली, 23 सितंबर . एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 अक्टूबर को सार्वजनिक जीवन में अपने 25 साल पूरे कर रहे हैं, तो वहीं उनके द्वारा 1 जून 2020 को शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना के 6 सालों में देश भर के लाखों छोटे व्यापारियों की जिंदगी बदली है. जम्मू-कश्मीर के त्राल से लेकर मध्य प्रदेश के नीमच और हरियाणा के पानीपत तक इस योजना की सफलता की कहानियां सामने आ रही हैं.

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल में स्ट्रीट वेंडर्स ने से कहा कि पीएम स्वनिधि योजना के तहत मिली आर्थिक मदद उनके जीवन और छोटे कारोबार के लिए बेहद फायदेमंद रही है. इस योजना ने छोटे वेंडर्स और नए उद्यमियों के लिए आर्थिक मदद का एक भरोसेमंद जरिया दिया है.

वेंडर ने कहा कि योजना के तहत मिली मदद से उन्हें अपना रोजगार चलाने में काफी सहायता मिली है और उन्होंने कश्मीर के युवाओं से अपील की है कि वे सरकार द्वारा दी जा रही इस लोन सुविधा का लाभ उठाएं और अपना छोटा कारोबार शुरू करें या उसे मजबूत करें. उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी और स्थानीय नगर पालिका के कर्मचारियों का आभार जताया, जिन्होंने जमीनी स्तर पर इस योजना को पहुंचाया.

मध्य प्रदेश के नीमच में पीएम स्वनिधि योजना छोटे व्यापारियों की तकदीर बदल रही है. यहां नगर पालिका क्षेत्र में योजना का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर बहुत प्रभावी रहा है. फंड की कमी से जूझने वाले ठेला चालकों और छोटे दुकानदारों को बिना किसी परेशानी के लोन मिल रहा है. खासकर महिलाओं के लिए यह योजना आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बनी है.

सीएमओ (मुख्य नगर पालिका अधिकारी) दुर्गा बामनिया ने बताया, “कोरोना काल में स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे फुटकर व्यापारियों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पीएम स्वनिधि योजना लागू की गई थी. नीमच नगर पालिका में इस योजना के तहत लगभग 15,000 का लक्ष्य था और हमने आज तक 11,000 स्ट्रीट वेंडर्स को इसका लाभ दे दिया है.”

उन्होंने बताया कि यह स्कीम उन छोटे व्यापारियों के लिए है जो ठेला लगाते हैं या छोटा रोजगार चलाते हैं. पहले उन्हें कारोबार शुरू करने के लिए पैसे की दिक्कत आती थी. इस योजना में पहले चरण में 15 हजार, दूसरे चरण में 25 हजार और तीसरे चरण में 50 हजार रुपए का लोन दिया जाता है. समय पर लोन चुकाने के बाद अब इसमें क्रेडिट कार्ड का विकल्प भी आया है. नगर पालिका ने अब तक लगभग 40 क्रेडिट कार्ड बांटे हैं, जिनका छोटे व्यापारी लगातार उपयोग कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि महिला वेंडर्स को भी इस स्कीम से ज्यादा लाभ मिला है. चूड़ी बेचना, मनिहारी, कढ़ाई-बुनाई और फूल-माला बनाने का काम ज्यादातर महिलाएं ही करती हैं.

एक लाभार्थी प्रियंका जैन ने कहा, “मैं नीमच में रहती हूं. मुझे नगर पालिका से 10,000 रुपए के लोन की मदद मिली. उस लोन से मैंने अगरबत्ती का कच्चा माल मंगवाकर नया काम शुरू किया. इससे मुझे बहुत फायदा हुआ. मैं महिला होने के नाते यही कहना चाहूंगी कि प्रधानमंत्री जी महिलाओं के लिए जो कर रहे हैं, वह बहुत अच्छा है. उन्होंने मध्यवर्गीय और गरीब तबके की महिलाओं को सक्षम बनाया है.”

वहीं, एक अन्य लाभार्थी रेखा प्रजापति ने बताया, “मैं ग्वालटोली, नीमच की रहने वाली हूं. मुझे पीएम स्वनिधि के तहत 10,000 रुपए का लोन मिला, जिससे मैं अपना व्यवसाय बढ़ा रही हूं. हम मिट्टी के सामान बनाते और बेचते हैं. मैंने चाक खरीदा है. करवे, कलश, मटकी, मूर्तियां, दीपक ये सब बेचते हैं. इस योजना से मुझे और मेरी जैसी कई बहनों को बहुत लाभ मिला. हम पहले घर पर बैठी रहती थीं लेकिन अब बाहर निकलने का मौका मिला है.”

लाभार्थी गोपाल कृष्ण छाबड़ा ने कहा, “मेरा नाम गोपाल कृष्ण छाबड़ा है. मुझे पहले 10,000 रुपए का लोन मिला था और अभी 25,000 रुपए का लोन मिला है. 10,000 रुपए का लोन मैंने समय पर भरा था. पहले मैं छोटे स्केल पर काम कर रहा था, अब लोन मिलने से फायदा हुआ है. मैंने अपना मार्केट बढ़ाया है. मेरा खड़ा मसाला का काम है. मैं 10, 20, 50, 100 ग्राम तक के मसालों के पैकेट बेचता हूं.”

हरियाणा के पानीपत में भी पीएम स्वनिधि योजना ने छोटे कारोबारियों को अपने पैरों पर खड़े होने का मौका दिया है. यहां सब्जी की रेहड़ी लगाने वाले गोविंद की कहानी मिसाल है. लॉकडाउन से पहले मजदूरी करने वाले गोविंद ने लॉकडाउन के बाद सब्जी बेचना शुरू किया. उन्हें योजना के तहत पहले 10 हजार, फिर 20 हजार और बाद में 50 हजार रुपए का लोन मिला.

गोविंद ने बताया कि वह रोज दोपहर 3 बजे से रात 10 बजे तक रेहड़ी लगाते हैं. सभी खर्च निकालने के बाद 10 से 15 हजार रुपये महीने की बचत हो जाती है. इसी से 3100 रुपये की किस्त और परिवार का खर्च चलाते हैं. उनके परिवार में दो बच्चे, दो बहुएं और पोते-पोतियों समेत आठ सदस्य हैं.

गोविंद ने बताया कि उनके काम को देखते हुए उन्हें गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री से मिलने के लिए दिल्ली बुलाया गया था. तीन बार फोन भी आया लेकिन काम की व्यस्तता की वजह से वह नहीं जा सके, जिसका उन्हें आज भी मलाल है.

इसी तरह सुनीता ने भी योजना से रोजगार खड़ा किया. उन्होंने पहले चाय की रेहड़ी शुरू की, जो नहीं चली. फिर दोबारा लोन लेकर चाउमीन की रेहड़ी लगाई. उन्होंने पहले 10 हजार, फिर 20 हजार और 2024 में 50 हजार रुपए का लोन लिया और सभी किस्तें समय पर चुका रही हैं. सुनीता ने कहा कि पहले वह बच्चों के लिए छोटे-मोटे काम करती थीं लेकिन अब रेहड़ी से दुकान और बच्चों का खर्च निकल जाता है और उन्होंने पीएम मोदी का आभार जताया.

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वीकेयू/पीएम