वायुसेना की नई ताकत, ड्रोन की 16 श्रेणियों का खाका सामने रखा

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर . भविष्य की हवाई जंग में ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभाने जा रही हैं. इसे देखते हुए भारतीय वायुसेना ने अपनी तैयारी तेज कर दी है. वायुसेना ने मानवरहित और स्वायत्त प्रणालियों को लेकर अपना दीर्घकालिक रोडमैप रक्षा उद्योग के सामने रखा है. इसमें 16 प्रकार की प्रणालियों को चार श्रेणियों में बांटा गया है. इसका मकसद देश में ही ऐसी आधुनिक तकनीक विकसित करना है, जो भविष्य की सैन्य जरूरतों के अनुरूप हो.

इस दिशा में भारतीय वायुसेना ने 21 अक्टूबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में उद्योग जगत के साथ विशेष कार्यशाला आयोजित की. इस बैठक में वायुसेना और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा रक्षा उद्योग के 100 से अधिक वरिष्ठ पेशेवर शामिल हुए. दरअसल आधुनिक हवाई अभियानों में अब केवल पारंपरिक विमानों की ताकत ही महत्वपूर्ण नहीं रह गई है. मानवरहित विमान, अपने आप काम करने वाली प्रणालियां और एक साथ तालमेल से उड़ान भरने वाले ड्रोन समूह युद्ध की रणनीति बदल रहे हैं.

मानवयुक्त और मानवरहित विमानों को मिलकर इस्तेमाल करने की क्षमता भी भविष्य के अभियानों में अहम होगी. इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए वायुसेना ने अपनी जरूरतों का खाका सीधे उद्योग जगत के सामने रखा है. वायुसेना के रोडमैप में 16 प्रकार की विभिन्न प्रणालियां शामिल हैं. इन्हें चार श्रेणियों में बांटा गया है. इनमें रणनीतिक, अभियानगत, सामरिक और वितरित अथवा कम लागत में बड़ी संख्या में इस्तेमाल की जा सकने वाली प्रणालियां शामिल हैं.

इस रोडमैप को पहले वायुसेना के ‘ड्रोनथॉन’ कार्यक्रम में पेश किया गया था. अब इसे व्यवस्थित तरीके से उद्योग जगत, नए उद्यमों, शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान एवं विकास संगठनों तक पहुंचाया गया है. कार्यशाला में इन संस्थानों को वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे बातचीत करने और भविष्य की जरूरतों को समझने का अवसर मिला.

वायुसेना मुख्यालय में आयुध प्रणालियों के महानिदेशक एयर मार्शल प्रेमकुमार कृष्णस्वामी ने कहा कि भारतीय वायुसेना देश में मानवरहित प्रणालियों को अपनाने में सबसे आगे रही है. भविष्य में भी वह इस क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका बनाए रखना चाहती है.

उन्होंने कहा कि वायु शक्ति तेजी से स्वायत्त प्रणालियों और ड्रोन समूहों के इस्तेमाल की ओर बढ़ रही है. इसलिए वायुसेना अपनी जरूरतों को स्पष्ट रूप से उद्योग के सामने रख रही है, ताकि जरूरी तकनीकों का केंद्रित विकास हो और उन्हें समय पर सेना में शामिल किया जा सके.

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जीसीबी/डीकेपी