
नई दिल्ली, 30 अक्टूबर . भारत का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में 7.15 लाख करोड़ रुपए रहा है, जो कि सरकार द्वारा चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित किए गए राजकोषीय घाटे लक्ष्य का 42.1 प्रतिशत है. यह जानकारी सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी डेटा में दी गई.
पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में देश को 5.7 लाख करोड़ रुपए का राजकोषीय घाटा हुआ था.
सरकारी डेटा के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में देश की शुद्ध कर प्राप्तियां 12.8 लाख करोड़ रुपए रही हैं, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 12.3 लाख करोड़ रुपए थीं. यह शुद्ध कर प्राप्तियों में सालाना आधार पर 4.06 प्रतिशत की वृद्धि को दिखाता है.
वित्त वर्ष 27 की अप्रैल-सितंबर अवधि में गैर-कर आय 4.8 लाख करोड़ रुपए रही है, जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि में 4.7 लाख करोड़ रुपए थी. यह गैर-कर आय में सालाना आधार पर 2.12 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है.
चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कुछ सरकारी खर्च 25.5 लाख करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि में 23 लाख करोड़ रुपए था. यह सालाना आधार पर 10.8 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है.
इस दौरान पूंजीगत खर्च में भी वृद्धि देखने को मिली है. यह वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही के 5.8 लाख करोड़ रुपए से सालाना आधार पर करीब 12 प्रतिशत बढ़कर 6.5 लाख करोड़ रुपए हो गया है.
सरकार ने पूरे वित्त वर्ष 27 के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को 16.96 लाख करोड़ रुपए पर निर्धारित किया है, जो कि जीडीपी का 4.3 प्रतिशत है.
इससे पहले बीते महीने सरकार ने कहा था कि वह चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में 7.86 लाख करोड़ रुपए उधार लेगी. इस उधारी कार्यक्रम में 15,000 करोड़ रुपए के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड भी शामिल होंगे. वित्त मंत्रालय के अनुसार यह राशि 23 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से जुटाई जाएगी.
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, दूसरी छमाही की उधारी के साथ पूरे वित्त वर्ष में दिनांकित प्रतिभूतियों के जरिए सरकार की कुल उधारी लगभग 15.9 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है.
केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चालू वित्त वर्ष के लिए 17.2 लाख करोड़ रुपए उधार लेने का प्रस्ताव रखा था.
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एबीएस