
कोलकाता, 31 अक्टूबर . पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के पहले छह महीनों के दौरान ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के पांच पूर्व मंत्रियों को गिरफ्तार किया गया. इनमें से फिलहाल केवल एक ही जमानत पर बाहर है. ये मामले पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई कथित गड़बड़ियों से जुड़े हैं.
पूर्व मंत्रियों की गिरफ्तारी की शुरुआत राज्य के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस से हुई थी. इसके बाद तीन अन्य पूर्व परिवहन राज्यमंत्री रहे दिलीप मंडल, पूर्व सुधार सेवा मंत्री उज्ज्वल बिस्वास और उत्तर बंगाल विकास विभाग संभालने वाले उदयन गुहा को गिरफ्तार किया गया था.
इस सूची में सबसे नया नाम इंद्रनील सेन का है, जो राज्य के पूर्व पर्यटन मंत्री और सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के राज्यमंत्री रह चुके हैं. गायक से राजनेता बने सेन को इस हफ्ते की शुरुआत में एक कथित फर्जी ‘दुर्गा पूजा पास’ घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था. यह मामला यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त दुर्गा पूजा उत्सव से जुड़े टूर (यात्राओं) से जुड़ा है.
इन पांच पूर्व मंत्रियों में से फिलहाल उज्ज्वल बिस्वास ही जमानत पर बाहर हैं. सेन पुलिस हिरासत में हैं जबकि बोस सहित बाकी तीन पूर्व मंत्री न्यायिक हिरासत में हैं.
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुजीत बोस को पश्चिम बंगाल में नगर निकायों की भर्तियों से जुड़े करोड़ों रुपये के ‘नौकरी के बदले नकद’ मामले में गिरफ्तार किया था. वहीं, दिलीप मंडल, उज्ज्वल बिस्वास और उदयन गुहा को पश्चिम बंगाल पुलिस ने भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और राजनीतिक हिंसा के आरोपों से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया था.
इंद्रनील सेन को इस हफ्ते की शुरुआत में कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया. इन पांचों में से वे अकेले ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके खिलाफ ईडी और कोलकाता पुलिस दोनों ही कथित फर्जी ‘दुर्गा पूजा पास’ घोटाले की समानांतर जांच कर रहे हैं.
सेन के खिलाफ चल रहे मामले ने तब विशेष ध्यान खींचा, जब ईडी की जांच में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम सामने आया. इस महीने की शुरुआत में ईडी ने एक बयान जारी किया, जिसमें ‘ऑक्टेव रिकॉर्ड्स’ नामक कंपनी से जुड़े एक लेन-देन के मामले में ममता बनर्जी का नाम लिया गया. यह कंपनी इंद्रनील सेन की है.
एजेंसी के अनुसार, इस कंपनी के खातों से बैंकिंग चैनलों के जरिए कथित तौर पर लगभग 30 लाख रुपये ममता बनर्जी को ट्रांसफर किए गए थे. हालांकि, सेन का कहना था कि यह भुगतान रॉयल्टी के तौर पर किया गया था. इसके अलावा, पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान कथित संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित एक न्यायिक जांच आयोग ने सेन से जुड़े मामले की जांच शुरू कर दी है.
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एसडी/पीएम