देश के सांख्यिकीय ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र ने ‘विस्तार’ योजना को दी मंजूरी; 4,371.10 करोड़ रुपए होंगे खर्च

नई दिल्ली, 4 नवंबर . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को ‘विकसित भारत इनिशिएटिव फॉर स्टैटिकल ट्रांसफॉरमेशन, एनालिटिक्स एंड रिसर्च (विस्तार)’ स्कीम को मंजूरी दी.

विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप, विस्तार योजना को समयबद्धता, डेटा की सटीकता, सामंजस्यपूर्ण और एआई-तैयार डेटासेट के साथ अंतरसंचालनीयता को बढ़ाने के लिए एक गतिशील, वास्तविक समय और भविष्य के लिए तैयार आधिकारिक सांख्यिकीय ढांचे को स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है.

कैबिनेट के मुताबिक, यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रहेगी और इसका कुल बजट 4,371.10 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है.

विस्तार योजना तत्काल नीतिगत जरूरतों के आधार पर संसाधनों को गतिशील रूप से आवंटित करने की रणनीतिक लचीलापन प्रदान करेगी. यह बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण करने, पद्धतिगत अनुसंधान, डिजिटल परिवर्तन और राष्ट्रीय डेटा गवर्नेंस के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देगी. विस्तार योजना में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की सभी सांख्यिकीय और डेटा प्रबंधन गतिविधियां शामिल होंगी, और यह देश की आधिकारिक सांख्यिकीय प्रणाली को उन्नत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

विस्तार योजना के तीन प्रमुख घटक हैं, जिसमें व्यापक सांख्यिकीय कार्य और इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाना, सांख्यिकीय सुदृढ़ीकरण के लिए समर्थन (एसएसएस) और आर्थिक जनगणना (ईसी) शामिल हैं.

‘व्यापक सांख्यिकीय संचालन और इकोसिस्टम सुदृढ़ीकरण’ घटक के तहत, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 16वें एफसी चक्र के दौरान 59 सर्वेक्षण कराने का प्रस्ताव रखा है. इससे पहले 43 प्रमुख सर्वेक्षण कराए गए थे. इन नए सर्वेक्षणों से विभिन्न क्षेत्रों में डेटा की महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहतर होगी और समय पर लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप संभव हो सकेंगे.

सांख्यिकीय सुदृढ़ीकरण के लिए समर्थन (एसएसएस) घटक के तहत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सांख्यिकीय क्षमताओं को बदलने के लिए, उन्हें एक नए डिजाइन किए गए और परिणाम-आधारित ढांचे (एसएसएस 2.0) के माध्यम से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी.

आर्थिक जनगणना (ईसी) घटक के अंतर्गत, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से 8वीं आर्थिक जनगणना (ईसी) आयोजित करेगा. इससे ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर तक सभी गैर-कृषि प्रतिष्ठानों और उनमें काम करने वाले कर्मचारियों का विस्तृत डेटा और जानकारी मिलेगी. यह अर्थव्यवस्था के असंगठित क्षेत्र का आकलन प्रदान करेगा और ‘नेशनल स्टैटिस्टिकल बिजनेस रजिस्टर’ (एसबीआर) तैयार करने के लिए एक आधार (बेसलाइन) का काम करेगा, जिससे लक्षित उद्यम सर्वेक्षणों और रणनीतिक हस्तक्षेपों को सुविधाजनक बनाया जा सकेगा.

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एबीएस/