
पटना, 28 जुलाई . बिहार आर्थिक अपराध इकाई ने बिहार लोक सेवा आयोग की शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई-3) के कथित पेपर लीक मामले में एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया है. यह चल रही जांच में एक और बड़ी घटना है. ईओयू 296 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है.
ईओयू की ओर से मंगलवार को जारी बयान के अनुसार, पटना के आर्थिक अपराध शाखा के पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले की जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर डॉ. मनीष कुमार को सोमवार को गिरफ्तार किया गया.
जांचकर्ताओं का आरोप है कि संजीव मुखिया के नेतृत्व वाले पेपर लीक सिंडिकेट के सदस्यों के संपर्क में डॉ. मनीष कुमार थे और परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराने की साजिश में शामिल थे.
आरोप है कि उन्होंने परीक्षा से पहले लीक हुए प्रश्न-पत्र की तैयारी के लिए 30 छात्रों को एक आरक्षित वाहन से झारखंड के हजारीबाग पहुंचाया था.
यह मामला 16 मार्च, 2024 को पटना के आर्थिक अपराध शाखा के पुलिस स्टेशन में दर्ज केस से संबंधित है.
इस मामले की जांच भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम, 1981 की संबंधित धाराओं के तहत की जा रही है.
ईओयू के अनुसार, डॉ. मनीष कुमार ने 2021 में पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी.
इसके बाद उन्होंने पोस्ट-ग्रेजुएशन करने के लिए नौकरी से इस्तीफा देने से पहले कैमूर जिले में सरकारी डॉक्टर के तौर पर काम किया. गिरफ्तारी के समय, वे कथित तौर पर पोस्ट-ग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे.
एजेंसी ने बताया कि टीआरई-3 पेपर लीक मामले की जांच के सिलसिले में अब तक 296 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने दोहराया कि परीक्षा प्रश्न-पत्र लीक करने वाले सिंडिकेट और ऐसी अवैध गतिविधियों से कथित तौर पर लाभ उठाने वाले लोगों के खिलाफ उनकी कार्रवाई जारी रहेगी.
अधिकारियों ने कहा कि जांच अभी जारी है और जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. ईओडब्ल्यू ने कहा कि कथित साजिश में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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डीकेएम/पीएम