
नई दिल्ली, 4 मई . बेंगलुरु 2035 तक दुनिया में सबसे तेजी से विकसित होने वाला बड़ा शहर बन सकता है. इसकी वजह शहर में तेजी से ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) और अच्छे टैलेंट का बढ़ना है.
प्रॉपर्टी कंसल्टिंग फर्म सैविल्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके इंडेक्स (जिसमें 245 शहरों का आकलन किया गया) ने शीर्ष 20 शहरों में कई भारतीय शहरों को स्थान दिया है और पाया है कि इन सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से 85 प्रतिशत एशिया प्रशांत क्षेत्र के हैं.
इंडेक्स में शीर्ष 50 शहरों में से तीन-चौथाई शहर एशिया प्रशांत क्षेत्र के हैं, जिनमें भारत, वियतनाम और चीन अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. युवा और कुशल कार्यबल, बढ़ते आंतरिक प्रवासन और उच्च आय वाले परिवारों की बढ़ती संख्या जैसे कारक शीर्ष बीस शहरों में शामिल भारतीय शहरों के विकास के प्रमुख चालक हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन तेजी से विकसित हो रहे शहरों में रियल एस्टेट बाजारों के तेजी से विकसित होने की उम्मीद है, जिससे सभी क्षेत्रों में निवेशकों और डेवलपर्स के लिए मजबूत अवसर पैदा होंगे.
शहरों का मूल्यांकन कई आर्थिक संकेतकों के आधार पर किया गया, जिनमें 2035 तक शहर की जीडीपी वृद्धि, व्यक्तिगत संपत्ति वृद्धि, जनसंख्या निर्भरता अनुपात, आंतरिक प्रवासन और 70,000 डॉलर से अधिक आय वाले परिवारों की संख्या शामिल हैं.
इसमें केवल उन्हीं शहरों को शामिल किया गया जिनकी जीडीपी 2025 में 50 अरब डॉलर या उससे अधिक थी.
सैविल्स इंडिया के रिसर्च एंड कंसल्टिंग के प्रबंध निदेशक अरविंद नंदन ने कहा, “बेंगलुरु का विश्व के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहर के रूप में स्थान भारत की संरचनात्मक शक्तियों को दर्शाता है, जिसमें युवा, कुशल कार्यबल, एक परिपक्व प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र और क्षमता केंद्र स्थापित करने वाली वैश्विक कंपनियों की बढ़ती मांग शामिल है.”
उन्होंने आगे कहा कि इंडेक्स में भारत की बढ़ती उपस्थिति इस बात का संकेत है कि देश का शहरी विकास व्यापक आधार वाला है और इसके प्रमुख शहरों के रियल एस्टेट बाजार अगले दशक में महत्वपूर्ण विस्तार के लिए तैयार हैं.
सैविल्स इंडिया ने एक अन्य रिपोर्ट में कहा है कि भारत में कार्यालयों की मांग मजबूत बनी हुई है, जिसका मुख्य कारण जीसीसी देशों का विस्तार और कंपनियों की ग्रेड-ए, टिकाऊ कार्यस्थलों के प्रति प्राथमिकता है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में निजी इक्विटी निवेश 2026 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 66 प्रतिशत बढ़कर 1.2 अरब डॉलर हो गया.
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