बेंगलुरु खदान हादसा: बिना चेतावनी के ऊपर की खदान से पत्थर धकेलना बना हादसे की वजह

बेंगलुरु, 2 जुलाई . कर्नाटक के बेंगलुरु दक्षिण में पत्थर से दबकर सात मजदूरों की मौत हो गई है. पुलिस ने बताया कि पत्थर की खदान में सात मजदूरों की मौत जिस बड़े पत्थर (बोल्डर) के नीचे दबकर हुई, उसे ऊपर स्थित दूसरी खदान में चल रही एक जेसीबी मशीन ने धक्का दिया था.

गुरुवार सुबह एक पत्थर की खदान में एक बहुत बड़ा पत्थर मजदूरों के ऊपर गिर गया, जिससे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर कर्नाटक के सात प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई.

यह हादसा बेंगलुरु दक्षिण तालुक के तवरेकेरे पुलिस थाना क्षेत्र के मडापटना गांव स्थित कावेरी क्रशर यूनिट में हुआ.

मृतकों की पहचान रामू, राजपाल सिंह, सत्यानारायण सिंह, राम अवतार सिंह, राजेंद्र प्रसाद, नुहार और भुवनेश्वर सिंह के रूप में हुई है. सभी की उम्र 30 से 40 साल के बीच थी.

घटनास्थल का दौरा करने के बाद सेंट्रल जोन के आईजीपी एस. गिरीश ने पत्रकारों से कहा, “यहां दो खदानें हैं. ऊपर वाली खदान एक मालिक की है और नीचे वाली खदान दूसरे मालिक की है. सुबह दोनों जगह काम चल रहा था. ऊपर वाली खदान में एक जेसीबी मशीन पत्थरों को हटा रही थी. उसी दौरान एक बड़ा पत्थरलुढ़क गया और नीचे काम कर रहे मजदूरों पर गिर गया.”

उन्होंने बताया, “नीचे वाली खदान में कुल 16 मजदूर काम कर रहे थे. इनमें से सात की मौके पर ही मौत हो गई. पांच मजदूरों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से एक की हालत गंभीर है. वहीं चार अन्य मजदूर किसी तरह जान बचाकर भाग निकले.”

आईजीपी ने कहा, “मृतकों में एक मजदूर कर्नाटक के यादगिर जिले का रहने वाला था, जबकि बाकी सभी मध्य प्रदेश के थे. घायलों में एक मजदूर छत्तीसगढ़ का है.”

हादसे में बाल-बाल बचे तमिलनाडु के गोपी ने आरोप लगाया कि ऊपर वाली खदान में काम कर रहे लोगों ने नीचे काम कर रहे मजदूरों को कोई चेतावनी नहीं दी.

उन्होंने कहा, “ऊपर काम करने वालों को नीचे काम कर रहे मजदूरों को पहले से बता देना चाहिए था, लेकिन किसी ने हमें नहीं बताया. मैं पिछले आठ साल से यहां काम कर रहा हूं. ऊपर वाले हमेशा हमें पहले सूचना देते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. हम चार लोग किसी तरह भागकर बच गए. अगर पहले से बताया गया होता तो हमें खतरे का पता चल जाता. एक पत्थर मुझे भी लगा, लेकिन फिर भी मैं वहां से भागने में सफल रहा. उस समय वहां 15 से 30 लोग काम कर रहे थे. हादसे में ट्रैक्टर और जेसीबी जैसी भारी मशीनें भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं.”

पत्थर इतनी तेजी से गिरा कि कई मजदूर उसके नीचे बुरी तरह दब गए. पुलिस ने बताया कि शव इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो गया. हादसे में एक ट्रैक्टर, एक टिपर और अन्य भारी मशीनें भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं.

इस बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने विधान सौधा में इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मगदी रोड पर स्थित दो पास-पास की खदानों में यह दुखद हादसा हुआ है. मुझे जानकारी मिली है कि सात लोगों की मौत हुई है. सभी शव निकाल लिए गए हैं और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं. यह साफ हो गया है कि वहां कोई ब्लास्टिंग नहीं हुई थी. मुझे आज दोपहर तक पूरी रिपोर्ट मिल जाएगी. अभी यह जांच की जा रही है कि दोनों खदानें कानूनी रूप से चल रही थीं या अवैध रूप से. सभी नियमों का पालन होना चाहिए. मुझे यशवंतपुर के विधायक एस.टी. सोमशेखर से भी जानकारी मिली है.”

मुख्यमंत्री ने कहा, “रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी. पूरी जानकारी मिलने के बाद मुआवजे का भी ऐलान किया जाएगा. सबसे जरूरी बात यह है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए.”

मृतकों में से एक मजदूर के बेटे ने हादसे को याद करते हुए कहा, “मैं रात की शिफ्ट में काम करके घर जाने वाला था, तभी मुझे फोन आया. मेरे पिता सुबह करीब 6.20 बजे काम पर आए थे. वे पत्थर लोड कर रहे थे, तभी यह हादसा हुआ. मेरे पिता का शव वहीं पड़ा था और मैं ही उसे वहां से लेकर आया. मेरे पिता पिछले छह महीने से यहां काम कर रहे थे.”

एएमटी/वीसी