विनायकराव पटवर्धन: संगीत साधना से रंगमंच और फिर गुरु-सेवा तक का सफर

नई दिल्ली, 22 अगस्त . हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की दुनिया में कुछ कलाकार सिर्फ अपनी आवाज के लिए नहीं, बल्कि संगीत को समाज तक पहुंचाने के लिए याद किए जाते हैं. ऐसी ही बहुआयामी शख्सियत विनायकराव पटवर्धन थे. उन्होंने गायक, शिष्य, गुरु, अभिनेता और संगीत प्रचारक के रूप में आधी सदी से अधिक लंबे करियर … Read more

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां: जब शहनाई ने चौखट लांघकर दुनिया के मंच पर अपनी जगह बनाई

नई दिल्ली, 21 अगस्त . 21 अगस्त 2006… इस दिन एक ऐसी आवाज खामोश हो गई, जिसने शहनाई को सिर्फ एक वाद्य यंत्र नहीं रहने दिया. जिस शहनाई की धुन को कभी विवाह और पारंपरिक अवसरों तक सीमित माना जाता था, उसी शहनाई को उस्ताद बिस्मिल्लाह खां ने कॉन्सर्ट हॉल से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक … Read more

टॉयलेट एक ‘सच्ची’ कथा : सफाईकर्मियों को समानता दिलाने वाले संघर्ष के नायक, समाज की भी बदली सोच

नई दिल्ली, 14 अगस्त . 15 अगस्त को देश आजादी का जश्न मना रहा होता है और उसी दिन एक ऐसे व्यक्ति की सांसें थम गई थी, जिसने अपनी जिंदगी उन लोगों की आजादी के लिए लगा दी, जिन्हें समाज ने बराबरी से दूर रखा था. यह कहानी है बिंदेश्वर पाठक की, एक ऐसे व्यक्ति … Read more

शिवपूजन सहाय : कलम के साधक की कहानी, जिसने साहित्य और पत्रकारिता को मिशन बनाया

नई दिल्ली, 8 अगस्त . कुछ लोग साहित्य लिखते हैं, तो वहीं कुछ लोग साहित्य को दिशा देते हैं और कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो साहित्य की सेवा में पूरी जिंदगी लगा देते हैं. 9 अगस्त 1893 को बिहार के भोजपुर जिले के उनवांस गांव में जन्मे शिवपूजन सहाय इसी तीसरी श्रेणी के साहित्य-साधक … Read more

विश्वकवि टैगोर : उपलब्धियों से परे एक जीवंत विचार, जिनकी प्रासंगिकता आज भी बरकरार

नई दिल्ली, 6 अगस्त . कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनका जीवन केवल उपलब्धियों का इतिहास नहीं होता, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक जीवंत विचार बन जाता है. रवींद्रनाथ टैगोर ऐसे ही महापुरुष थे, जिन्होंने साहित्य, शिक्षा, समाज सुधार और मानवीय मूल्यों को एक साथ जोड़कर एक ऐसी दृष्टि दी, जिसकी प्रासंगिकता आज … Read more