मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद ‘शुद्धिकरण’ पर कांग्रेस बोली-संविधान और समानता का अपमान

नई दिल्ली, 13 अगस्त . उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण’ हवन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. कांग्रेस सांसदों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे दलितों के प्रति भेदभाव, संवैधानिक मूल्यों और समानता के सिद्धांत के खिलाफ बताया है. सांसदों ने घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है और उत्तराखंड सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं.

कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि भारत में 75 वर्षों के संवैधानिक शासन के बावजूद ऐसी घटनाएं होना बेहद दुखद है. उन्होंने कहा कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता, सांसद, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष जैसे पद पर रहे व्यक्ति की रैली के बाद ‘शुद्धिकरण’ किया जाना गंभीर मामला है. मल्लू रवि ने कहा कि जिन्होंने यह किया है, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए.

कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने भी घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, जो दलित समुदाय से आते हैं, ने किसी सभा को संबोधित किया और उसके बाद उसी स्थान पर ‘शुद्धिकरण’ कराया गया, तो इससे ज्यादा अपमानजनक कुछ नहीं हो सकता. उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की चुप्पी पर सवाल उठाया और कहा कि मुख्यमंत्री को इस मामले पर बोलना चाहिए.

कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने भाजपा और आरएसएस की विचारधारा पर निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ तिरंगा यात्रा और राष्ट्रवाद की बात की जाती है, जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता के मामले में संविधान में दिए गए समानता के सिद्धांत का कथित रूप से उल्लंघन किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जिस मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस नेताओं ने जनसभा की, उसी स्थान का ‘शुद्धिकरण’ किया जाना बेहद आपत्तिजनक है. शैलजा ने सवाल किया कि आखिर यह कैसा शुद्धिकरण है. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाएं एक विशेष विचारधारा और मानसिकता को दर्शाती हैं. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को ऐसी सोच और मानसिकता से ‘शुद्धिकरण’ की जरूरत है. साथ ही उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटना के बावजूद कार्रवाई नहीं होती है तो यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़ा करता है.

हल्द्वानी के विवाद के साथ ही संसद सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच टकराव भी जारी रहा. कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने केंद्र सरकार पर जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि देश में महंगाई, रिकॉर्ड बेरोजगारी, छात्रों पर कार्रवाई, नीट पेपर लीक, शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था, ई20 ईंधन से जुड़े सवाल और हरियाणा में कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजित करने जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, लेकिन सरकार ने इन पर पर्याप्त जवाब नहीं दिया.

हुड्डा ने कहा कि विपक्ष संसद में इन्हीं मुद्दों को उठाने के लिए आया था. उन्होंने सवाल किया कि अगर संसद में जनता के सवाल नहीं उठाए जाएंगे तो विपक्ष इन मुद्दों को कहां ले जाएगा. उनके मुताबिक, सरकार ने अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया है.

कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने भी सरकार पर विपक्ष को चर्चा का पर्याप्त अवसर नहीं देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को सदन में कई बार बोलने का अवसर मिलता है, लेकिन गृह मंत्री सदन में मौजूद नहीं होते. उन्होंने छात्रों, देश की जनता और कथित डोनेशन घोटाले से प्रभावित लोगों की ओर से माफी की मांग का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं को लेकर माफी संसद के भीतर मांगी जानी चाहिए.

लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने पर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के मुद्दों, फंड से जुड़े आरोपों, लोगों की आस्था और प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई जैसे सवालों पर सरकार ने चर्चा नहीं की. उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा से बच रही है जबकि सदन चलाने की जिम्मेदारी सरकार की होती है.

एसएके/पीएम