
तिरुवनंतपुरम, 13 . पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के उस दावे को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुझे मेसी डील के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है. अब उनके इस दावे को लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि अधिकारियों ने अपनी जांच में यह पाया है कि उनकी तत्कालीन सरकार निजी क्षेत्रों की ओर से पूरी सक्रियता के साथ हस्तक्षेप किया था. अब मौजूदा सरकार इस मामले की तह से जांच कर रही है और आगे क्या कदम उठाना है. इस पर भी विचार कर रही है.
इस मामले को लेकर 7 जुलाई 2025 को उस वक्त बड़ा खुलासा हुआ, जब केरल के स्पोर्ट्स डिमार्टमेंट के सेक्रेटरी की ओर से अर्जेंटिना में स्थित भारतीय दूतावास को पत्र भेजा गया था. इस पत्र में अर्जेंटिना फुटबॉल एसोसिएशन से मुआवजा माफ करने को कहा गया था. यह मुआवजा प्रयोजक रिपोर्टर बॉडकॉस्टिंग कॉरपोरेशन पर थोपा गया था, क्योंकि उन्होंने भुगतान करने में देरी कर दी थी.
पत्र में कहा गया है कि अर्जेंटिना अगर अपने कदम पीछे करती है, तो इससे राज्य को जहां आर्थिक चुनौतियों का सामना करना होगा, तो वहीं सरकार गरीमा भी प्रभावित होगी और भविष्य में फंड जुटाने में भी समस्याएं होंगी.
अर्जंटिना के दौरे को प्रमुख रूप से त्रिपक्षीय व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है. जिसमें राज्य सरकार, निजी प्रायोजक और एएफए भी शामिल हैं.
विजयन ने बुधवार को इन सभी विषयों पर बयान देते हुए अब इन सभी चाजों को बाहर आने ही दीजिए.
इस पत्र में विजयन के पूर्व के रूख के बारे में भी सवाल उठाया गया है, जिसमें उन्होंने इस बात का जिक्र किया था कि उन्हें उस विवादित व्यवस्था के बारे में जानकारी नहीं थी.
पूर्व की सरकार ने अपने पहले के फैसले में निजी कंपनियों की सहायता के लिए डिप्लोमेटिक चैनल का इस्तेमाल करने की बात कही गई है, ताकि एएफए के साथ चल रहे विवाद को खत्म किया जा सके. अब यह पूरा मुद्रा क्राइम ब्रांच की जांच के लिए काफी अहम हो चुका है.
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने गुरुवार को कहा कि सरकार की ओर से मेसी प्रकरण की पूरी गंभीरता से तफ्तीश की जा रही है. प्रारंभिक जांच में गंभीर खामी सामने आई है, जिसमें जीएसटी से जुड़ा मुद्दा शामिल है.
उन्होंने कहा कि एएफए के साथ हुआ एग्रीमेंट प्राइवेट कंपनी को बिना किसी रुचि के दिया गया था, ताकि पूरे राज्य को अंधेरे में रखा जा सके. उन्होंने कहा कि वित्त विभाग हर प्रकार की आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा.
पूर्व खेल मंत्री वी. अब्दुर रमान और उनके कार्यालय की भूमिका के साथ-साथ, वित्त और कानून विभाग की मंजूरी के बिना कालूर स्टेडियम को समय से पहले सौंपने में कथित प्रक्रियात्मक उल्लंघनों की भी जांच हो सकती है.
यह पूरा विवाद अब काफी अहम मोड़ पर आ चुका है. इससे पहले पूर्व की सरकार की ओर से प्रयाजकों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जा चुका है. इसमें अब यह मांग की गई है कि स्पॉन्सर को एएफए की पेनाल्टी से बचाया जाए.
क्राइम ब्रांच की जांच से इस पूरे लेनदेन का खुलासा होने वाला है, ऐसे में पिछली सरकार के सामने अब मुख्य सवाल यह नहीं है कि मेस्सी डील के बारे में किसे पता था बल्कि यह है कि इसे बचाने के लिए किसने और क्यों कदम उठाए.
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एसएचके/पीएम