
नई दिल्ली, 22 जून . दिल्ली के विद्युत मंत्री आशीष सूद ने सोमवार को पिछली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर वित्तीय जवाबदेही से बचने और दिल्ली के निवासियों को लूटने के लिए निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के साथ गहरे स्तर पर सांठगांठ और मिलीभगत करने का आरोप लगाया.
डिस्कॉम के सीएजी (कैग) ऑडिट को मंजूरी देने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए, मंत्री सूद ने कहा कि इस फैसले ने अरविंद केजरीवाल और उनके प्रशासन की विफलताओं और छिपे हुए मंसूबों को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है.
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का हमेशा से यह मानना रहा है कि बिजली कंपनियों, आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के बीच एक सांठगांठ, एक मिलीभगत थी. साल 2015 में, एक विशेष फैसले को बहाना बनाकर यह झूठा दावा किया गया था कि डिस्कॉम का सीएजी ऑडिट कराने की अनुमति नहीं है. अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही और कुछ नहीं किया.
विद्युत मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ऑडिट के खिलाफ बिजली कंपनियों का कड़ा विरोध ही इस बात का पुख्ता सबूत है कि पर्दे के पीछे कोई साजिश चल रही थी.
उन्होंने कहा कि हमारा सीएजी ऑडिट की अनुमति लेने के लिए आगे बढ़ना, और इसके विरोध में डिस्कॉम का हाई कोर्ट जाना, अपने आप में यह साबित करता है कि बिजली कंपनियां, अरविंद केजरीवाल और ‘आप’ सरकार आपस में मिले हुए थे. वे जानबूझकर खातों के ऑडिट से बच रहे थे, और साथ ही रेगुलेटरी एसेट्स (नियामक परिसंपत्तियों) के नाम पर दिल्ली की जनता पर बोझ डालने का काम कर रहे थे.
सूद ने जनता पर बिना किसी औचित्य के भारी वित्तीय बोझ छोड़ने के लिए पिछली सरकार की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि कंपनियों के पास न तो कहीं कोई घाटा दिख रहा है और न ही फंड की कोई स्पष्ट कमी है, फिर भी अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली के लोगों पर 38,000 करोड़ रुपए का बोझ डालकर चली गई.
हाई कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए विद्युत मंत्री ने आगे कहा कि कानूनी स्पष्टता ने पिछली सरकार के धोखे को उजागर कर दिया है. हाई कोर्ट का यह कहना कि 2015 के फैसले में सीएजी ऑडिट कराने पर कोई प्रतिबंध नहीं था, अपने आप में यह दर्शाता है कि अरविंद केजरीवाल और ‘आप’ सरकार पूरी तरह से विफल रहे.
उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए मंत्री ने कहा कि उपराज्यपाल कार्यालय द्वारा औपचारिक सुनवाई की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है. इस कदम पर कोई रोक नहीं लगी क्योंकि Supreme Court ने भी स्टे (रोक) लगाने से इनकार कर दिया था.
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एमएस/