
नई दिल्ली, 30 अगस्त . अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण के मुद्दे पर एनडीए में खींचतान बढ़ गई है. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने रविवार को केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान पर असंवैधानिक काम करने का आरोप लगाया.
जीतन राम मांझी की यह प्रतिक्रिया चिराग पासवान के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें चिराग पासवान ने एससी/एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग का विरोध किया था.
चिराग पासवान ने कहा था कि जो लोग ऐसी मांग कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने कहा था कि आरक्षण आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि सदियों से हो रहे सामाजिक भेदभाव, बहिष्कार और छुआछूत को दूर करने के लिए बनाया गया है.
से बात करते हुए जीतन राम मांझी ने कहा, “चिराग पासवान जो कुछ भी कर रहे हैं, वह असंवैधानिक है.”
उन्होंने समझाते हुए कहा, “यह असंवैधानिक है क्योंकि हम ‘कोटे के अंदर कोटा’ की मांग कर रहे हैं, जिसका समर्थन Supreme Court ने भी किया है. कोर्ट ने बहुमत से फैसला देते हुए राज्यों को इसे लागू करने का निर्देश दिया है, और इस फैसले के आधार पर भारत में करीब आधा दर्जन राज्यों ने इसे पहले ही लागू कर दिया है.”
जितन राम मांझी ने सवाल उठाया, “तो जो चीज पहले ही लागू हो चुकी है, उसकी मांग करने के लिए इस्तीफा देने की क्या बात है? जो संविधान के खिलाफ बोल रहा है, उसे इस्तीफा देना चाहिए.”
दरअसल, चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी और उनके बेटे बिहार के मंत्री संतोष सुमन पर निशाना साधा था. चिराग पासवान ने पत्रकारों से कहा था, “उन्हें क्रीमी लेयर की अवधारणा का समर्थन करने दें और अपने-अपने पद छोड़ दें.”
जितन राम मांझी और संतोष सुमन एससी/एसटी आरक्षण में उप-वर्गीकरण और ‘कोटे में कोटा’ की मांग कर रहे हैं. उनका तर्क है कि आरक्षण का लाभ सभी समुदायों तक बराबर नहीं पहुंचा है. संतोष सुमन ने कहा कि उनकी मांग आरक्षण खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि वंचित समूहों को उनका हिस्सा दिलाने के लिए है.
वहीं चिराग पासवान का कहना है कि आरक्षण को आर्थिक नजरिए से देखने से इसका मूल उद्देश्य कमजोर हो जाएगा. उन्होंने किसी भी बदलाव से पहले व्यापक संवैधानिक और संसदीय बहस की मांग की.
हाजीपुर से सांसद चिराग पासवान ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी पर भी निशाना साधा. उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और उनकी पार्टी से सवाल किया कि इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद अगर सामाजिक भेदभाव बना हुआ है, तो इसके लिए कांग्रेस को भी जवाब देना होगा.
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वीकेयू/डीएससी