भारत-उज्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक सेतु बना योग, ताशकंद में पीएम मोदी ने देखा विशेष सत्र

ताशकंद, 30 अगस्त . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को उज्बेकिस्तान में विशेष योग सत्र का हिस्सा बने. उन्होंने साधकों की प्रस्तुति को सराहा और राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव का आभार जताया कि उन्होंने देश को योग से जोड़ दिया है.

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सत्र की क्लिप साझा की. ऐसे सत्र से साक्षात्कार कराया जो भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंधों की एक अनूठी तस्वीर पेश करता है. ताशकंद में पीएम मोदी ने उज्बेकिस्तान के 52 योग साधकों की विशेष योग प्रस्तुति देखी.

इसके बाद पीएम ने वीडियो पोस्ट में कहा, “आप लोगों ने बहुत बढ़िया योग करके दिखाया है और इसमें सभी उम्र के लोग शामिल हुए. मैं अपने मित्र, राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने उज्बेकिस्तान को योग से जोड़ दिया है.”

इस विशेष योग सत्र में उज्बेकिस्तान की योग फेडरेशन के छह सदस्य भी शामिल थे, जिन्होंने जून 2026 में अहमदाबाद में आयोजित पहले विश्व योगासन चैंपियनशिप में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया था. इन साधकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 18 पदक अपने नाम किए हैं. इनमें एक स्वर्ण, 14 रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं.

चैंपियनशिप में उज्बेकिस्तान की पूरी टीम ने विभिन्न श्रेणियों में कुल 25 पदक जीते. अहमदाबाद में मिली इस उपलब्धि के बाद ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी के सामने इन खिलाड़ियों की भागीदारी ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच योग, खेल और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की मिसाल पेश की.

‘योग फेडरेशन ऑफ उज्बेकिस्तान’ के जिन छह सदस्यों ने विश्व योगासन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और ताशकंद के इस विशेष सत्र में प्रदर्शन किया, उनमें रखमानोव कामोल एर्किनोविच, रखमानोव अलीखोन कामोलादिनोविच, अखुनोवा दिनारा एर्किनोव्ना, जुमानोवा आलिया अबुबाकिर किजी, अंसातबायेवा आयसुलु अरिसलान किजी और शकिरोव रेडजेप दिमित्रियेविच शामिल रहे.

इन साधकों ने साबित किया कि योग अब केवल भारत की प्राचीन परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इसे स्वास्थ्य, अनुशासन और प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में भी देखा जा रहा है. उज्बेकिस्तान में योग के प्रति बढ़ती रुचि भारत के साथ उसके लोगों के स्तर पर विकसित हो रहे सांस्कृतिक संबंधों का भी उदाहरण है.

अहमदाबाद में आयोजित पहला विश्व योगासन चैंपियनशिप (4-8 जून 2026) भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव था. इस प्रतियोगिता ने योगासन को वैश्विक स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में मंच प्रदान किया. विभिन्न देशों के खिलाड़ियों की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के प्रदर्शन ने जता दिया कि योगासन का कैनवास व्यापक है और इसकी स्वीकार्यता अब दुनिया भर में बढ़ रही है.

उज्बेकिस्तान के खिलाड़ियों का अहमदाबाद में शानदार प्रदर्शन और उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में ताशकंद में उनका योग सत्र में शामिल होना दोनों देशों के बीच खेल और सांस्कृतिक संबंधों की निरंतरता को दर्शाता है.

केआर/