फर्जी आरटीओ ई-चालान मामला: पुलिस ने धोखाधड़ी की रकम संभालने वाले जामताड़ा गैंग के साथी को दबोचा

सूरत, 13 अगस्त . सूरत की साइबर क्राइम सेल की ओर से जामताड़ा के एक साइबर फ्रॉड गैंग के कथित साथी को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, यह व्यक्ति पीड़ितों से ठगे गए पैसे को ‘म्यूल’ बैंक अकाउंट्स के जरिए संभालता था और उस रकम को कैश में बदलकर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचाता था.

आरोपी की पहचान झारखंड के गिरिडीह ज़िले के बिसनपुर गांव के रहना वाला 26 वर्षीय सीताराम मंडल के तौर पर हुई है. पहले से साबरमती जेल में बंद आरोपी को हिरासत में लिया गया. पुलिस ने कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया है.

पुलिस के मुताबिक, 20 नवंबर, 2025 को एक अनजान वाट्सएप नंबर से पीड़ित के दोस्त राकेश शर्मा के फोन पर खतरनाक एपीके फाइल भेजी गई. हैक किए गए अकाउंट से पीड़ित के बेटे के दोस्त वाले वाट्सएप ग्रुप में भेजकर वायरल की गई.

पीड़ित ने जैसे ही फाइल के डाउनलोड की, उसका फोन हैक हो गया और उसके बैंक खाते से 5,02,562 रुपए ट्रांसफर हो गए. पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क कर 14 दिसंबर, 2025 को सूरत साइबर क्राइम सेल से संपर्क किया था. साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी.

पुलिस ने बताया कि बैंकिंग ट्रांजेक्शन की जांच समेत तकनीकी जांच से साबरमती जेल में बंद सीताराम मंडल को लेकर जानकारी सामने आई. पुलिस के मुताबिक, पहले से गिरफ्तार किए गए आरोपी निशित नाथवानी ने 1,47,954 रुपये एक क्रेडिट बिल के पेमेंट के लिए किए थे.

पुलिस के अनुसार, नाथवानी ने 15 से 20 प्रतिशत कमीशन अपने पास रखा और बाकी कैश एक कैश डिपॉजिट मशीन के जरिए सीताराम मंडल के बैंक अकाउंट में जमा कर दिया. आरोप है कि मंडल ने 5 से 10 प्रतिशत कमीशन काट कर जामताड़ा गैंग के फरार सदस्यों को बाकी कैश सौंप दिया था.

साइबर क्राइम सेल की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे अनजान सोर्स से मिली एपीके फाइलों को डाउनलोड न करें, भले ही वे आरटीओ चालान, बैंक, केवाईसी अपडेट, कस्टमर सपोर्ट, सरकारी योजनाओं, अपॉइंटमेंट बुकिंग या दूसरी जानी-पहचानी सर्विस से जुड़ी क्यों न लगें. साइबर क्राइम ने लोगों को एसएमएस या ईमेल के जरिए मिले संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने की सलाह भी दी.

एसडी/पीएम