
उत्तराखंड, 30 जुलाई . उत्तराखंड के पूर्वी हिमालयी सीमांत जिला पिथौरागढ़ में भगवान शिव और माता जयंती को समर्पित ‘ध्वज मंदिर’ स्थित है. प्राकृतिक सुंदरता के बीच बसा यह मंदिर धार्मिक महत्व के साथ-साथ अपनी सकारात्मक ऊर्जा के लिए भी जाना जाता है.
गुरुवार को उत्तरखांड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके महत्व पर प्रकाश डाला. मंदिर की महत्ता का बखान करने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का शानदार वीडियो शेयर किया.
इस वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, “पिथौरागढ़ जिले में भगवान शिव और माता जयंती को समर्पित ‘ध्वज मंदिर’ आध्यात्मिक पहचान और अटूट आस्था का एक प्रमुख केंद्र है. प्राकृतिक सुंदरता से घिरा यह पवित्र स्थान भक्तों को आध्यात्मिक शांति और अलौकिक ऊर्जा का अनुभव कराता है.”
सीएम धामी ने बताया कि नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है. उन्होंने लिखा, “खासकर नवरात्र के पावन अवसर पर यहां भव्य पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं, जिनमें दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त आते हैं. पिथौरागढ़ आने पर इस पवित्र मंदिर के दर्शन जरूर करें.”
लगभग 2000 मीटर की ऊंचाई पर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित ‘ध्वज मंदिर’ मुख्य जयंती माता मंदिर से लगभग 200 फीट नीचे भगवान शिव का एक प्राचीन गुफा मंदिर स्थित है. मंदिर से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों और चारों ओर के हरे-बरे पहाड़ों का सुंदर नजारा दिखाई देता है.
नवरात्र और महाशिवरात्रि के पावन अवसरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है और विशेष मेले का आयोजन किया जाता है.
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस ऊंची पहाड़ी पर प्राचीन ऋषियों ने तपस्या की थी और उन्हें यहां देवी-देवताओं के दिव्य दर्शन हुए थे.
इस मंदिर का इतिहास और इससे जुड़ी कथाएं बहुत प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि इस स्थान पर भगवान शिव के नाम पर एक ‘ध्वज’ लगाया गया था, जिसके बाद स्थानीय निवासियों ने इसका नाम ‘ध्वज मंदिर’ रख दिया.
एक अन्य जनश्रुति के अनुसार, इस स्थल का नाम ‘कपड़ी वंश’ के पूर्वजों द्वारा रखा गया था. इस मंदिर का ऐतिहासिक संबंध खांडनाथ से भी माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि यहां स्थित लगभग 50 फीट गहरी गुफा में दीर्घकाल तक भगवान शिव का वास रहा है. इस पावन स्थल का धार्मिक महत्व अत्यंत विशिष्ट है, जहां सभी प्रमुख पर्वों को अत्यंत उल्लास के साथ मनाया जाता है.
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एनएस/एएस