
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर . केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया है. साथ ही, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर विशेष निर्यात शुल्क में क्रमश: 3 रुपए प्रति लीटर और 0.50 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की है. यह जानकारी वित्त मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी अधिसूचना में दी गई.
नई संशोधित दरों के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क अब शून्य हो गया है, जो कि पहले 2.5 रुपए प्रति लीटर था. डीजल के निर्यात पर शुल्क बढ़कर 11.50 रुपए प्रति लीटर हो गया है, जो कि पहले 8.5 रुपए प्रति लीटर था. एटीएफ के निर्यात पर शुल्क को बढ़कर 11 रुपए प्रति लीटर कर दिया है, जो कि पहले 10.50 रुपए प्रति लीटर था.
मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के कारण मार्च के अंत में निर्यात शुल्क लागू किए गए थे. इसकी समीक्षा केंद्र सरकार द्वारा हर 15 दिन में दी जाती है.
इसका उद्देश्य ऐसे समय में रिफाइनरों को घरेलू खरीदारों के मुकाबले विदेशी बाजारों को प्राथमिकता देने से रोकना है, जब वैश्विक स्तर पर कीमतें निर्यात के लिए बेहतर लाभ प्रदान कर रही हैं.
अमेरिका और ईरान में तनाव बढ़ने और हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है. अब ब्रेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम बढ़कर 113.10 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. बीते एक हफ्ते में इसमें 1.55 प्रतिशत और बीते एक महीने में 15.71 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है. वहीं, पिछले तीन महीनों में यह करीब 26 प्रतिशत बढ़ चुका है.
संघर्ष शुरू होने से पहले, भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता था. यह एक प्रमुख समुद्री मार्ग है जो फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है. इस रास्ते से होने वाले व्यापारिक जहाजों के आवागमन में बाधा आने के कारण, भारत को तेल मंगाने के लिए अन्य विकल्पों की तलाश करनी पड़ी है.
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एबीएस/