सरकार लाएगी मल्टीलिंगुअल एआई, अब अपनी भाषा में मिलेंगी सरकारी सेवाएं

नई दिल्ली, 13 अगस्त . केंद्र सरकार मल्टीलिंगुअल और वॉयस-फर्स्ट एआई तकनीक पर काम कर रही है ताकि शासन और सार्वजनिक सेवाएं ज्यादा समावेशी और आसान बन सकें.

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इस लक्ष्य के लिए डिजिटल इंडिया ‘भाषिणी’ डिवीजन डीआईबीडी और नीति आयोग ने भाषिणी फॉर सेवा/संचालन पहल के तहत एक घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस साझेदारी का मकसद ‘भाषिणी’ के मल्टीलिंगुअल एआई इकोसिस्टम का इस्तेमाल करके शासन को ज्यादा समावेशी और सुलभ बनाना है. इसके लिए नीति आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाओं में एआई आधारित भाषा तकनीकों को जोड़ा जाएगा.

सरकारी बयान में कहा गया, “यह साझेदारी नागरिकों को उनकी पसंदीदा भारतीय भाषाओं में सरकारी जानकारी और सेवाओं तक पहुंच दिलाएगी. इससे सरकार और नागरिकों के बीच संवाद मजबूत होगा और सार्वजनिक सेवा वितरण में बहुभाषी संचालन को बढ़ावा मिलेगा.”

इस साझेदारी के तहत ‘भाषिणी’ के भाषा अनुवाद एपीआई और रेफरेंस एप्लीकेशन के जरिए नीति आयोग की सेवाओं तक बहुभाषी पहुंच आसान होगी. इसके साथ ही अनुवाद मॉडल के विकास और लगातार सुधार में मदद मिलेगी. भाषा तकनीकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम और संचार वर्कफ्लो में भी जोड़ा जाएगा.

इस इको सिस्टम का एक अहम हिस्सा ‘स्मृति’ है. इसका पूरा नाम सिस्टम फॉर मीटिंग रिकॉर्डिंग, इनफॉर्मेशन एंड ट्रांसक्रिप्शन इंटरफेस है. इसे ‘भाषिणी’ के साथ मिलकर विकसित किया गया है. ‘स्मृति’ बैठक के मिनट्स को अपने आप तैयार करेगा और उनका बहुभाषी अनुवाद भी करेगा. इससे सरकारी कामकाज की दक्षता बढ़ेगी और अंतिम व्यक्ति तक शासन ज्यादा समावेशी बनेगा.

यह सहयोग नीति आयोग के ‘नीति तारा’ यानी टूलकिट फॉर एनालिसिस, रिव्यू एंड एक्शन पर भी आधारित है. ‘नीति तारा’ डेटा को जमीनी स्तर पर कार्रवाई में बदल रहा है.

अब तक देशभर में 200 से ज्यादा क्षमता निर्माण सत्र आयोजित किए जा चुके हैं. इनके जरिए जिलों और ब्लॉकों के 4,000 से अधिक अधिकारियों को डेटा आधारित अंतर्दृष्टि के लिए प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे साक्ष्य आधारित फैसले ले सकें.

साझेदारी के तहत नीति आयोग के विभिन्न क्षेत्रों के लिए रेफरेंस एप्लीकेशन और वॉयस बॉट भी विकसित किए जाएंगे. साथ ही विशेष शब्दावली और क्षेत्र विशेष की जरूरतों के लिए भाषा तकनीक को मजबूत किया जाएगा.

‘भाषिणी सहयोगी’ के माध्यम से ‘भाषादान’ का इस्तेमाल करके भाषाई डेटा का संग्रह, क्यूरेशन और प्रसार किया जाएगा. इसके लिए नीति आयोग के अधिकारियों और आम नागरिकों से टेक्स्ट, ऑडियो और वीडियो सैंपल देने का आग्रह किया जाएगा.

वीकेयू/पीएम