
नई दिल्ली, 29 अप्रैल . कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे ज्यादा क्लेम सेटलमेंट किया है, जिससे डिजिटल सुविधा और आसान पहुंच में बड़ा सुधार हुआ है.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2025-26 में 8.31 करोड़ दावे निपटाए, जो 2024-25 के 6.01 करोड़ से काफी ज्यादा हैं.
इनमें से 5.51 करोड़ दावे एडवांस या आंशिक निकासी के थे, जिससे यह पता चलता है कि लोग अब जरूरत पड़ने पर आसानी से अपने पीएफ का पैसा निकाल पा रहे हैं.
संगठन ने अपने ऑटोमेशन सिस्टम को भी मजबूत किया है. लगभग 71.11 प्रतिशत एडवांस क्लेम ऑटो मोड से प्रोसेस हुए, जिसमें 3 दिन के अंदर पैसा मिल जाता है. यह पिछले साल 59.19 प्रतिशत था.
इससे मैन्युअल काम कम हुआ है और काम करने की गति बढ़ी है.
डिजिटल सुविधाओं में भी बड़ा सुधार हुआ है. 6.68 करोड़ लोगों ने बिना चेक अपलोड किए क्लेम किया, 1.59 करोड़ लोगों ने बिना नियोक्ता की मंजूरी के बैंक खाते लिंक किए, 70.55 लाख ट्रांसफर क्लेम ऑटोमेटिक हुए, 24.84 लाख लोगों ने खुद ट्रांसफर शुरू किया और 29.34 लाख लोगों ने अपनी प्रोफाइल खुद ठीक की और बिना ऑफिस जाए पीएफ सेवाओं का उपयोग किया.
सिर्फ अप्रैल 2026 में ही ईपीएफओ ने 61.03 लाख क्लेम निपटाए, जिनमें करीब 74 प्रतिशत एडवांस क्लेम ऑटो मोड से हुए और 98.70 प्रतिशत क्लेम 20 दिनों के अंदर निपट गए.
इस बीच, एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि ईपीएफओ ने मार्च में 2025-26 के लिए पीएफ जमा पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर तय की, जो लगातार दूसरे साल समान रखी गई है.
यह फैसला केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की 239वीं बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने की. बैठक में राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, श्रम एवं रोजगार सचिव वंदना गुरनानी और ईपीएफओ प्रमुख रमेश कृष्णमूर्ति भी मौजूद थे.
सीबीटी के फैसले के बाद इस ब्याज दर को मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय को भेजा जाएगा. मंजूरी मिलने के बाद यह दर 7 करोड़ से ज्यादा खाताधारकों के खातों में लागू होगी.
ईपीएफ जमा पर ब्याज की गणना हर महीने की जाती है, लेकिन इसे वित्त वर्ष के अंत में खातों में जोड़ा जाता है. हालांकि, 36 महीने तक निष्क्रिय रहने वाले खातों पर ब्याज नहीं मिलता, क्योंकि उन्हें निष्क्रिय माना जाता है.
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डीबीपी