
नई दिल्ली, 25 जून . भारत और अमेरिका ने सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), आपूर्ति श्रृंखला और क्रिटिकल मिनरल में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के लिए वाशिंगटन में उच्च स्तरीय वार्ता की. यह जानकारी गुरुवार को जारी किए बयान में दी गई.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने प्रमुख टेक्नोलॉजी सेक्टर में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब एस. हेलबर्ग से मुलाकात की.
दूतावास ने पोस्ट में कहा, “इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सचिव एस. कृष्णन ने द्विपक्षीय टेक्नोलॉजी सहयोग को और मजबूत करने के लिए अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब एस. हेलबर्ग से मुलाकात की.”
दोनों पक्षों ने अलग-अलग तरह की और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने, खासकर सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और एआई को अपनाने के क्षेत्रों में सहयोग के मौकों पर चर्चा की.
इसके अलावा, अधिकारियों ने जरूरी मिनरल्स तक पहुंच सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की. इन मिनरल्स को एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी और दूसरे रणनीतिक उद्योगों के लिए बहुत जरूरी माना जा रहा है.
यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब अहम और उभरती हुई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग बढ़ रहा है. दोनों देश आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और रणनीतिक रूप से अहम सेक्टर में दूसरों पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं.
इस महीने की शुरुआत में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि ग्लोबल सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में लगभग 10 लाख (एक मिलियन) प्रोफेशनल्स की कमी है. यह भारत के लिए इस सेक्टर में कुशल टैलेंट के मुख्य आपूर्तिकर्ता के तौर पर उभरने का एक बड़ा मौका है.
मंत्री के अनुसार, ग्लोबल सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की वैल्यू अभी लगभग 800 अरब डॉलर है और उम्मीद है कि एक साल के अंदर यह 1 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर जाएगी.
वैष्णव ने कहा था, “2032 तक, दुनिया भर में सेमीकंडक्टर सेक्टर में लगभग 10 लाख नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है. साथ ही, इस इंडस्ट्री में लगभग 10 लाख कुशल पेशेवरों की कमी भी है.”
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एबीएस