नीट यूजी री-टेस्ट : वायुसेना की निगरानी में पेपर, छात्रों ने कहा- ये इंतजाम पहले होने चाहिए थे

नई दिल्ली, 17 जून . नीट-यूजी री-टेस्ट को लेकर देशभर के छात्रों में अभी भी चिंता और तनाव का माहौल बना हुआ है. हालांकि इस बार परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं और प्रश्नपत्रों के परिवहन की जिम्मेदारी भारतीय वायुसेना को सौंपी गई है, लेकिन पिछली पेपर लीक की घटना का असर अब भी छात्रों के मन से नहीं निकला है.

चंडीगढ़ में प्रोफेसर मनीष गोयल ने से कहा कि छात्र अभी भी मानसिक दबाव में हैं. एक छात्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक विद्यार्थी ने उनसे कहा कि उसे अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि उसे दोबारा परीक्षा देनी पड़ेगी.

प्रोफेसर गोयल ने कहा कि कल्पना कीजिए, जिस छात्र ने पिछली परीक्षा में 697 अंक हासिल किए हों, वह फिर से उसी प्रक्रिया से गुजरना नहीं चाहेगा. अब उसके सामने यह दबाव है कि क्या वह री-टेस्ट में भी वही प्रदर्शन दोहरा पाएगा.

उन्होंने कहा कि इस बार प्रशासन ने पेपर लीक की लगभग सभी संभावित आशंकाओं को खत्म करने की कोशिश की है. पहले कथित तौर पर पेपर लीक का संबंध अनुवाद प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों से बताया गया था, लेकिन इस बार संबंधित लोगों को क्वारंटीन किया गया है, जिससे उस संभावना को भी समाप्त करने का प्रयास किया गया है.

वहीं, एक छात्र ने कहा कि वह पिछले ढाई वर्षों से नीट की तैयारी कर रहा है. उसका सिलेबस करीब नौ महीने पहले पूरा हो चुका था और तब से वह लगातार उसी विषयवस्तु को दोहरा रहा है. उसने कहा कि एक समय के बाद यह प्रक्रिया थका देने वाली और निराशाजनक लगने लगती है. छात्रों के मन में अब भी यह सवाल है कि परीक्षा का स्तर कैसा होगा और क्या उम्मीद की जाए.

एक अन्य छात्र ने कहा कि इस बार सरकार ने लगभग पूरी तरह सुरक्षित व्यवस्था की है. पेपर तैयार करने वालों को क्वारंटीन किया गया है, प्रश्नपत्रों का परिवहन वायुसेना कर रही है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखा जा रहा है. इससे पेपर लीक की संभावना काफी कम हो गई है. हालांकि उसने यह भी कहा कि पहले हुई चूक से जो नुकसान छात्रों को हुआ, उसकी भरपाई नहीं की जा सकती. छात्रों ने तनाव, अनिश्चितता और दोबारा तैयारी का बोझ झेला है. ये सभी कदम स्वागत योग्य हैं, लेकिन ऐसी व्यवस्था शुरुआत से ही होनी चाहिए थी.

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