
नई दिल्ली, 8 अगस्त . कमोडिटी बाजार के लिए आने वाला सप्ताह काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपए की चाल बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी. खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी.
इस सप्ताह के दौरान वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 1.29 प्रतिशत चढ़कर 83.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. हालांकि यह अब भी पिछले सप्ताह के बंद स्तर 90.12 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना हुआ है. वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) सितंबर डिलीवरी वाला क्रूड 78.18 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो पिछले सप्ताह के 84.67 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कम है.
विश्लेषकों के अनुसार, तेल बाजार में यह अस्थिरता मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रमों के कारण रही, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है. बाजार में यह उम्मीद बन रही है कि इस क्षेत्र में जहाजरानी को लेकर कोई समझौता हो सकता है, जिससे तेल आपूर्ति सुचारू हो सकेगी.
सप्ताह की शुरुआत में डब्ल्यूटीआई क्रूड में तेज गिरावट आई थी, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को रोकते हुए कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया. बाद में जलमार्ग संचालन को लेकर सकारात्मक खबरों के चलते तेल कीमतों में कुछ सुधार देखने को मिला.
कमोडिटी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने को लेकर कोई औपचारिक समझौता हो जाता है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव आ सकता है. वहीं यदि क्षेत्र में तनाव दोबारा बढ़ता है, तो तेल बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम लौट सकता है और कीमतें फिर ऊपर जा सकती हैं.
घरेलू बाजार की बात करें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर कच्चा तेल सप्ताह के दौरान गिरकर करीब 7,100 रुपए प्रति बैरल तक पहुंच गया था. बाद में इसमें सुधार हुआ और यह लगभग 7,400 रुपए के आसपास बंद हुआ.
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, एमसीएक्स कच्चे तेल के लिए 7,500-7,550 रुपए का स्तर निकटतम प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) बना हुआ है. वहीं 7,380-7,300 रुपए का दायरा निकट भविष्य में प्रमुख समर्थन (सपोर्ट) माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कीमतें इस समर्थन स्तर से नीचे फिसलती हैं, तो एमसीएक्स क्रूड 7,250 रुपए तक गिर सकता है. इसके बाद 7,100 से 7,000 रुपए के बीच मजबूत समर्थन देखने को मिल सकता है.
इस बीच, भारतीय रुपया भी सप्ताह भर मजबूत रुख में दिखाई दिया. डॉलर के मुकाबले यूएसडी/आईएनआर विनिमय दर लगभग 95.2 रुपए पर बंद हुई, जबकि सप्ताह के दौरान यह करीब 94.9 रुपए के निचले स्तर तक पहुंच गई थी.
विश्लेषकों के अनुसार, तकनीकी संकेत फिलहाल रुपए के पक्ष में हैं. यदि यूएसडी/आईएनआर की दर 94.9 रुपए से नीचे टिकती है, तो रुपया और मजबूत होकर 94.7 से 94.5 रुपए के स्तर तक पहुंच सकता है.
दूसरी ओर, 95.2 से 95.4 रुपए का दायरा डॉलर के लिए महत्वपूर्ण प्रतिरोध क्षेत्र माना जा रहा है. यदि यह स्तर पार होता है, तो यूएसडी/आईएनआर जोड़ी 95.5 से 95.7 रुपए तक जा सकती है, जिससे रुपए पर दबाव बढ़ सकता है.
तकनीकी संकेतकों की बात करें तो रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) ऊंचे स्तरों से नीचे आया है, जबकि एमएसीडी संकेतक डॉलर की तेजी की रफ्तार में कमी दर्शा रहा है. यह स्थिति फिलहाल रुपए को समर्थन देती दिख रही है.
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगले सप्ताह रुपए और कमोडिटी बाजार की दिशा कई बाहरी कारकों पर निर्भर करेगी. इनमें अमेरिकी डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का निवेश प्रवाह और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति प्रमुख रहेंगे. यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं, तो रुपए को और मजबूती मिल सकती है और तेल कीमतों में नरमी जारी रह सकती है.
–
डीबीपी