
मुंबई, 27 अक्टूबर . शिवसेना नेता आनंद दुबे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एमपी-एमएलए कोर्ट से बरी किए जाने पर कांग्रेस को घेरा. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कोर्ट और चुनाव आयोग समेत सभी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाते हैं, लेकिन बरी होते ही जश्न मनाते हैं. वहीं, उन्होंने बाबा रामदेव को लेकर कहा कि वह संत हैं, राजनीतिक व्यक्ति नहीं. सभी को चुनाव लड़ने का अधिकार है.
शिवसेना नेता आनंद दुबे ने कहा, “बाबा रामदेव कोई राजनीतिक आदमी नहीं हैं. वह एक संत हैं, योग करते हैं और देश के करोड़ों लोगों को योग सिखाते हैं. उन्होंने किस परिप्रेक्ष्य में कहा, ‘मैं नहीं जानता.’ लेकिन वह असदुद्दीन ओवैसी से लड़ें, चाहे समाजवादी पार्टी से लड़ें, चाहे कांग्रेस से लड़ें, उनका अधिकार है.”
उन्होंने कहा कि हम जनता के बीच में जाकर अपने काम बताते हैं. पिछले दस वर्षों में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का जो काम है, जो कानून व्यवस्था इस समय मजबूत हुई है, जो उत्तर प्रदेश में निवेश पूरे विश्व से आ रहा है, वह हम बताएंगे. हम माताओं, बहनों और बच्चों की सुरक्षा के बारे में बात करेंगे. हम बताएंगे कि कैसे पिछले दस वर्षों में उत्तर प्रदेश को विकास की मुख्यधारा में लाया गया है. अब ओवैसी आएं, चाहे कोई भी आए. हम तो मेहनत करने वाले लोग हैं, मजदूर लोग हैं. हम राजा-महाराजा नहीं हैं.
आनंद दुबे ने कहा कि भाजपा तो पहले से ही जीत रही है. हम बार-बार कह रहे हैं कि ओवैसी की पार्टी कब बनी है? भाजपा तो 90 के दशक में भी सरकार बना चुकी है. आपको याद है ना, कल्याण सिंह मुख्यमंत्री रह चुके हैं, राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उत्तर प्रदेश से भाजपा का पुराना नाता है. जहां भगवान राम पैदा हुए हों, वहां भाजपा और शिवसेना का आज का नहीं, पुराना नाता है.
एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि आज 27 अक्टूबर है. आज चार राज्यों में जो विधान परिषद के चुनाव हुए हैं, उसकी काउंटिंग है. हमें पूरा विश्वास है कि एनडीए परिवार ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतेगा, चाहे उत्तर प्रदेश हो, चाहे बिहार हो, चाहे महाराष्ट्र हो, चाहे कर्नाटक हो, क्योंकि एनडीए परिवार ने बड़ी मेहनत की है.
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए शिवसेना नेता ने कहा कि राहुल गांधी को एमपी-एमएलए कोर्ट ने बरी किया है. यही राहुल गांधी हैं, जो कहते हैं कि हमें कोर्ट पर विश्वास नहीं है, हमें कचहरी पर विश्वास नहीं है, हमें Supreme Court पर विश्वास नहीं है, हमें चुनाव आयोग पर विश्वास नहीं है, हमें ईडी और सीबीआई पर विश्वास नहीं है. और जब बाइज्जत बरी होते हैं, तो नाचते हैं, झूमते हैं, गाड़ियों का काफिला लेकर चलते हैं, हर्षोल्लास में रहते हैं, लोग माला पहनाते हैं, तो यह दोहरी बात कैसे हो सकती है?
उन्होंने कहा कि आप बार-बार राजनीति की हार से परेशान हैं, तो जनता के बीच में जाइए, जनता का दिल जीतिए. हमें अपशब्द कहने से, प्रधानमंत्री के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने से आप नहीं जीतेंगे. कम से कम कोर्ट का तो सम्मान करिए. भाजपा अलग पार्टी है, कोर्ट अलग है. कोर्ट ने आपको बरी किया है. इसी कोर्ट पर आप प्रश्नचिह्न उठाते हैं, तो मुझे लगता है कि आपको आत्मचिंतन करना चाहिए. आने वाले समय में नेताओं को अपशब्द मत कहिए. आप बहुत बार वीर सावरकर का अपमान कर चुके हैं. प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का अपमान कर चुके हैं. हमें लगता है कि अब आप इतने वरिष्ठ हो रहे हैं. दो साल बाद आप साठ साल के होंगे, तो कम से कम अब थोड़ी गंभीरता दिखाइए.
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक निष्पक्ष संस्था है. हम बार-बार कह रहे हैं कि इसका राजनीति से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है. चाहे ईवीएम में गड़बड़ियां हों, चाहे चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों के आपसी मतभेद हों, इस पर वही जवाब दे पाएंगे. हम दूर से बैठकर सिर्फ देख सकते हैं. अगर ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और बाकी दूसरे सदस्य मिलकर चुनाव आयोग की तरफ से Supreme Court में यह हलफनामा दाखिल कर रहे हैं कि उन पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं, तो बात खत्म हो गई.
आनंद दुबे ने कहा कि यही तो हम बार-बार विपक्ष को समझा रहे हैं कि अगर कुछ गड़बड़ी है, कुछ तकलीफ है, तो आप चुनाव आयोग से बात करिए, आप Supreme Court में बात रखिए. बार-बार भारतीय जनता पार्टी को, एनडीए परिवार को, शिवसेना को, भाजपा को कोसना बंद कीजिए. चुनाव आयोग अलग है, हम अलग हैं. हम चुनाव आयोग की प्रक्रिया से जीतते हैं. हम चुनाव आयोग के मित्र या बी-टीम नहीं हैं. चुनाव आयोग चुनाव कराता है, हम लोगों के बीच में जाते हैं, हम चुनाव जीतते हैं और चुनाव आयोग परिणाम घोषित करता है. चुनाव आयोग अंपायर की भांति है. जब हम क्रिकेट खेलते हैं, तो हम आउट होते हैं, चाहे हम अच्छा रन बनाएं, चाहे सेंचुरी मारें, चाहे रन लें. यह सब देखना अंपायर का काम है. आप खेल नहीं पा रहे हैं, आप बार-बार आउट हो रहे हैं, हिट विकेट हो रहे हैं, कैच आउट हो रहे हैं, रन आउट हो रहे हैं और आप आरोप अंपायर पर लगा रहे हैं. अंपायर बेचारा तो खड़ा है, वह तो सिर्फ देख रहा है.
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केके/एबीएम