‘चुनाव से पहले का ड्रामा’, नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने के मुद्दे पर विपक्ष का केंद्र पर हमला

नई दिल्ली, 28 अगस्त . कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है, इस पर विपक्षी दलों ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. विपक्ष ने इसे चुनावी ड्रामा करार दिया.

विपक्षी नेताओं ने कहा कि वे संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को मौजूदा लोकसभा की 543 सीटों के आधार पर लागू करने का समर्थन करेंगे, लेकिन इसके लिए परिसीमन (डिलिमिटेशन) की शर्त नहीं होनी चाहिए.

यह विवाद उस समय सामने आया, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूछा कि क्या सरकार प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पारित करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है.

खड़गे ने कहा कि उन्होंने यह मांग इसलिए दोहराई क्योंकि संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने एक टीवी इंटरव्यू में विशेष सत्र बुलाए जाने के संकेत दिए थे.

शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने से बातचीत में भाजपा पर झूठ बोलने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “महिला आरक्षण विधेयक कब पारित हुआ था? 2023 में. आज जेनजी ऐसे झूठों के खिलाफ खड़ी हो गई है. अब महिलाएं भी सच्चाई समझ चुकी हैं. भाजपा झूठ के सहारे खड़ी है.”

सावंत ने याद दिलाया कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित हुआ था और उस समय सभी विपक्षी दलों ने उसका समर्थन किया था. उन्होंने कहा, “अगर सरकार वास्तव में आरक्षण देना चाहती है, तो मौजूदा 543 सीटों के आधार पर दे सकती है.”

सावंत ने यह भी कहा कि मौजूदा लोकसभा में ही सभी सांसदों को बोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता. उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पूरा ड्रामा किया जा रहा है.

पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा, “सरकार की सोच महिलाओं और गरीबों के प्रति विकृत है. वे नहीं चाहते कि गरीब, पिछड़ी और मध्यम वर्ग की महिलाएं राजनीति में आगे बढ़ें. उन्हें बाबा साहेब आंबेडकर के संविधान पर विश्वास नहीं है और न ही विपक्ष की सहमति की कोई परवाह है. उनकी चिंता सिर्फ 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर है.”

ओडिशा कांग्रेस के नेता अरविंद दास ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही संसद से पारित हो चुका है, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया. अगर मामला केवल महिला आरक्षण कानून का होता तो स्थिति अलग होती. सरकार इसे परिसीमन से जोड़ना चाहती है. जो काम वह पिछले सत्र में नहीं कर सकी, उसे अब विशेष सत्र बुलाकर करना चाहती है. सरकार हमेशा संवैधानिक परंपराओं को दरकिनार करने की कोशिश करती है.

सीपीआई नेता एनी राजा ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित हो चुका है और अब यह कानून है, लेकिन असली मुद्दा इसके क्रियान्वयन का है. महिलाओं को दो शर्तें जोड़कर गुमराह किया जा रहा है, जनगणना और परिसीमन. कानून को इस तरह बनाया गया है कि जब तक जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, महिला आरक्षण लागू नहीं किया जा सकेगा.

एएमटी/एबीएम