
नई दिल्ली, 3 नवंबर . भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सेवाएं निर्यात करने वाले निवासी व्यक्तियों के लिए ‘एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म’ (ईडीएफ) के अनुपालन नियमों को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है. इसके अनुसार, फ्रीलांसर और सर्विस निर्यातक व्यक्ति भुगतान से जुड़ी जरूरी जानकारी अपने अधिकृत डीलर (एडी) बैंक को उपलब्ध करा देंगे, तो यह मान लिया जाएगा कि उन्होंने ईडीएफ जमा कर दिया है.
आरबीआई ने ‘विदेशी मुद्रा प्रबंधन (वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात और आयात) (दूसरा संशोधन) विनियम, 2026’ जारी किए, जो 1 अक्टूबर, 2026 से पिछली तारीख से लागू हो चुके हैं.
सितंबर में अधिसूचित पिछली व्यवस्था के तहत, सेवा निर्यातकों को उस महीने के खत्म होने के 30 दिनों के भीतर ईडीएफ जमा करना होता था, जिस महीने में इनवॉइस जारी किया गया था. इस घोषणा की मदद से अधिकृत डीलर बैंक, आरबीआई के ‘एक्सपोर्ट डेटा प्रोसेसिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ (ईडीपीएमएस) में निर्यात लेनदेन को दर्ज कर सकते थे और निर्यात से प्राप्त होने वाली राशि की प्राप्ति को ट्रैक कर सकते थे.
जो निर्यातक किसी महीने के दौरान एक या अधिक प्राप्तकर्ताओं को सेवाएं देते हैं, वे ऐसे सभी निर्यातों के लिए एक ही ईडीएफ जमा कर सकते हैं. सॉफ्टवेयर के अलावा अन्य सेवाओं के निर्यातक, भुगतान प्राप्त होने की तारीख पर या उससे पहले ईडीएफ जमा कर सकते हैं.
फेमा के तहत, ईडीएफ एक ऐसा दस्तावेज है जिसे निर्यातक अपने एडी बैंक (अधिकृत डीलर बैंक) को सौंपता है. इसमें निर्यात की गई सेवाओं और विदेशी ग्राहकों से मिलने वाले संभावित भुगतान की जानकारी दी जाती है.
इस स्पष्टीकरण के अनुसार, जो व्यक्ति विदेशी ग्राहकों से कमाई करते हैं – जैसे कि फ्रीलांसर, यूट्यूबर और स्वतंत्र पेशेवर – उन्हें अलग से ईडीएफ जमा करने की जरूरत नहीं है, बशर्ते वे भुगतान से जुड़ी जरूरी जानकारी अपने बैंक को दे दें.
2 नवंबर को अधिसूचित किए गए नवीनतम संशोधन में ‘निवासी व्यक्ति’ की परिभाषा भी दी गई है और यह स्पष्ट किया गया है कि ईडीएफ कब ‘जमा माना जाएगा’. आरबीआई ने ‘निवासी व्यक्ति’ को भारत में रहने वाले एक वास्तविक व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया है.
यह संशोधन अनिवासी निर्यातकों को भी यही सुविधा देता है, जिसके तहत अगर किसी सेवा के लिए आने वाला भुगतान 10 लाख रुपए से अधिक नहीं है, तो ईडीएफ को स्वतः जमा माना जाएगा.
संशोधित प्रावधान के अनुसार, अधिकृत डीलर बैंकों को आईडीपीएमएस में सेवा आयात का विवरण दर्ज करना होगा. यह विवरण उस आयातक द्वारा दिया जाएगा जो ‘निवासी व्यक्ति’ नहीं है, और जहां इनवॉइस या अनुबंध का मूल्य 10 लाख रुपए से अधिक है. बैंक को यह विवरण मिलने के पांच कार्य दिवसों के भीतर इसे दर्ज करना होगा.
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एबीएस