नेपाल में आई त्रासदी में भारत को पड़ोसी देश की भूमिका निभानी चाहिए : शशि थरूर

काठमांडू, 27 अगस्त . कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को कहा कि यह जरूरी है कि भारत नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के संकट पर तुरंत प्रतिक्रिया दे और इस मुश्किल समय में पड़ोसी देश को जो भी मदद चाहिए, वह उपलब्ध कराए.

शशि थरूर ने से ​​बात करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि यह बहुत जरूरी है कि भारत इस त्रासदी पर तुरंत प्रतिक्रिया दे. जैसा कि आप जानते हैं, हमारे प्रधानमंत्री ने अपने समकक्ष से बात की. हमने तुरंत राहत सामग्री उपलब्ध कराई और हमें उम्मीद है कि और मदद भी आएगी.”

उन्होंने कहा कि नेपाल को वह सारी मदद मिलनी चाहिए जिसकी उसे जरूरत है, क्योंकि बाढ़ से हुई तबाही बहुत भयानक है.

उन्होंने को बताया, “सबसे जरूरी बात यह है कि नेपाल को वह सारी मदद मिले जिसकी उसे जरूरत है. तबाही बहुत भयानक रही है. न केवल लोगों की जान गई है बल्कि गांव भी बर्बाद हो गए हैं. 18 पुल बह गए हैं, हाईवे प्रभावित हुए हैं और आठ हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए हैं. यह बहुत गंभीर स्थिति है.”

थरूर ने कहा कि स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि कई लोग अभी भी लापता हैं, जिससे यह आशंका बढ़ गई है कि मरने वालों की अंतिम संख्या काफी बढ़ सकती है.

उन्होंने कहा, “इन सबके अलावा, अभी भी बहुत से लोग लापता हैं. मरने वालों की अंतिम संख्या बहुत ज्‍यादा हो सकती है. हमें अब तक केवल 160 मौतों की पुष्टि हुई है. कुछ लोग 180 कह रहे हैं लेकिन यह संख्या चार अंकों तक पहुंच सकती है.”

थरूर ने इस खबर पर उम्मीद जताते हुए कि 20 भारतीय पर्यटक मिल गए हैं कहा कि जो लोग अभी भी लापता हैं, उन्हें खोजने की कोशिशें जारी रहनी चाहिए.

उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि बाकी लोग भी मिल जाएंगे. हम सभी लापता लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं. यह उन परिवारों के लिए बहुत मुश्किल समय है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है.”

कांग्रेस सांसद ने कहा कि भारत को नेपाल की विशिष्ट जरूरतों के आधार पर मदद देनी चाहिए. उन्होंने ​​कहा, “मुझे लगता है कि इस समय नेपाल को जिस चीज की भी जरूरत हो, हमें वह करना चाहिए. नेपाल पुलिस, सेना और बाकी सभी लोग वहां मौजूद हैं. अगर उन्हें हमारी मदद की जरूरत महसूस होती है, तो हमें मदद देनी चाहिए. अगर उन्हें तकनीकी मदद या किसी और चीज की जरूरत है, तो हमें मदद के लिए आगे आना चाहिए. इन सभी स्थितियों में, यह मायने नहीं रखता कि हम क्या भेजना चाहते हैं, बल्कि यह मायने रखता है कि उन्हें हमसे क्या चाहिए.”

इससे पहले दिन में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने पुष्टि की कि हिमालयी देश में आए भयानक अचानक बाढ़ के बाद कम से कम 300 भारतीय नागरिक – जिनमें से ज्‍यादातर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री थे – लापता बताए जा रहे हैं.

खनाल ने काठमांडू में एनडीटीवी वर्ल्ड अन्वीक्षा समिट के दौरान बोलते हुए कहा कि रासुवा क्षेत्र में हुई इस त्रासदी के बाद 160 लोगों की मौत हो गई और हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है, जबकि अधिकारी तबाही के पैमाने का आकलन करने और लापता लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, अब मरने वालों की आधिकारिक संख्या बढ़कर 177 हो गई है.

खनाल ने कहा, “कुछ ही घंटों में एक के बाद एक कई शहर तबाह हो गए.” उन्होंने आगे कहा, “हजारों परिवारों के घर उजड़ गए हैं और वे अभी लापता हैं. हम अभी भी आपदा के पूरे पैमाने का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.”

एएसएच/पीएम