
नई दिल्ली, 19 अगस्त . अगले हफ्ते इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) लाने जा रही स्काईवेज एयर सर्विसेज लिमिटेड ने सेबी ने पास जमा कराए आधिकारिक दस्तावेजों में बताया है कि आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा कंपनी और उसकी सहायक कंपनी ब्रेस पोर्ट लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के खिलाफ धोखाधड़ी, अधिक बिलिंग, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोपों के संबंध में जांच की जा रही है.
स्काईवेज एयर सर्विसेज लिमिटेड का आईपीओ निवेशकों के लिए 24 अगस्त से खुल रहा है और 27 अगस्त तक खुला रहेगा. इसका प्राइस बैंड 131-138 रुपए प्रति इक्विटी शेयर है. इस इश्यू में 2.89 करोड़ इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू और 1.33 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) शामिल है.
आईपीओ दस्तावेज में बताया गया यह जोखिम यूके की पीजी पेपर कंपनी लिमिटेड की शिकायत पर दिल्ली की ईओडब्ल्यू द्वारा 12 दिसंबर, 2025 को दर्ज की गई एफआईआर नंबर 0172/2025 से जुड़ा है. इस एफआईआर में स्काईवेज एयर सर्विसेज को आरोपी नंबर 3 और उसकी सब्सिडियरी ब्रेस पोर्ट लॉजिस्टिक्स लिमिटेड को आरोपी नंबर 2 बताया गया है. 11 अगस्त, 2026 को दाखिल आरएचपी में इस एफआईआर का जिक्र कंपनी और उसकी सब्सिडियरी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही के तौर पर किया गया है.
आरएचपी और रिप्रेजेंटेशन में बताए गए आरोपों के अनुसार, पीजी पेपर ने आरोप लगाया है कि स्काईवेज ग्रुप की कंपनियों (जिनमें ब्रेस पोर्ट, आरआईवी वर्ल्डवाइड लिमिटेड.यूके और स्काईवेज एसएलएस लॉजिस्टिक्स जीएमबीएच शामिल हैं) ने मिली-जुली साजिश के जरिए फ्रेट का काम हासिल किया. इसमें बढ़ा-चढ़ाकर फ्रेट इनवॉइस बनाना, कथित रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और गलत जानकारी देना शामिल था.
शिकायतकर्ता का आरोप है कि 2021 से इन तीन सब्सिडियरी कंपनियों के जरिए 800 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार हुआ और उन्हें कम से कम 44.20 करोड़ रुपए का सीधा नुकसान हुआ.
पीजी पेपर की ओर से सेबी को दिए गए रिप्रेजेंटेशन में यह भी आरोप लगाया गया है कि ब्रेस पोर्ट और स्काईवेज ने मिलकर कंपनी से लगभग 44.20 करोड़ रुपए ज्यादा की इनवॉइसिंग की.
पीजी पेपर ने आरोप लगाया कि माल ढुलाई के खर्च को जानबूझकर बढ़ाया गया था. कुछ मामलों में तो यह मौजूदा बाजार दरों से लगभग 40 प्रतिशत से लेकर 300 प्रतिशत तक ज्यादा था. साथ ही, आरोप है कि माल ढुलाई की व्यवस्था से जुड़े एक कर्मचारी को लालच देकर कंपनी की आंतरिक जांच-पड़ताल की प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया.
एफआईआर में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं का जिक्र किया गया है.
दस्तावेजों में एक और अहम जोखिम की ओर इशारा किया गया है, जो एफआईआर के बाद होने वाली रेगुलेटरी कार्रवाई से जुड़ा है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (सीबीआईसी) ने 14 मई, 2026 को स्काईवेज के ‘ऑथराइज्ड इकोनॉमिक ऑपरेटर-एलओ’ सर्टिफिकेट को सस्पेंड करने और उसे रद्द करने का प्रस्ताव देते हुए एक नोटिस जारी किया.
जांच के नतीजे आने तक कंपनी का एईओ-एलओ स्टेटस 4 मई, 2026 से रद्द बना हुआ है. स्काईवेज ने 28 जुलाई, 2026 को संबंधित अथॉरिटी को अपना जवाब सौंपा था और यह मामला अभी भी बकाया है.
हालांकि, संपर्क करने पर कंपनी ने के सवालों पर कोई टिप्पणी नहीं की.
–
एबीएस