देश अब ‘भूत मतदाताओं’ से छुटकारा चाहता हैः नित्यानंद राय

नई दिल्ली, 4 अगस्त . राज्यसभा में मंगलवार को जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित हो गया. इस दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि देश अब ‘भूत मतदाताओं’ से छुटकारा चाहता है.

उन्होंने बताया इस बदलाव के पीछे कारण यह है कि यह देश चाहता है कि भारत माता की गोद में जन्म लेने वाले हर बच्चे का पंजीकरण निश्चित रूप से हो. यह मोदी सरकार का संकल्प है. वहीं जिसकी मृत्यु हो जाए, वह मृत्यु के बाद भी रिकॉर्ड में जीवित रहकर तुष्टिकरण करने वाली पार्टियों का मतदाता न बना रहे. इसलिए मृत्यु का समय पर पंजीकरण भी उतना ही आवश्यक है. यह देश अब ऐसे ‘भूत मतदाताओं’ से छुटकारा चाहता है.

नित्यानंद राय ने मंगलवार को ही यह संशोधन विधेयक सदन में प्रस्तुत किया था. इस दौरान उन्होंने कहा, “मैं यह प्रस्ताव करता हूं कि जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 का और संशोधन करने वाले विधेयक पर, लोकसभा द्वारा पारित रूप में, विचार किया जाए.” सदन में इस दौरान विपक्षी सांसदों द्वारा नारेबाजी होती रही. हंगामे के बीच जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, “मैं आदरणीय सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे इसे समझने की कोशिश करें. विलंबित पंजीकरण और उसके संभावित दुरुपयोग को ध्यान में रखते हुए संशोधन का प्रस्ताव किया गया है. इसके तहत यदि जन्म या मृत्यु की सूचना दो वर्ष के बाद दी जाती है, तो ऐसे मामलों में केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही रजिस्ट्रार पंजीकरण करेगा. यानी पंजीकरण तो रजिस्ट्रार ही करेगा.”

उन्होंने कहा कि वह एक और बात बताना चाहते हैं. पहले 21 दिन तक जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की जो प्रक्रिया थी, वह यथावत रखी गई है. 22 से 30 दिन के भीतर होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया भी पहले की तरह रजिस्ट्रार के माध्यम से ही रहेगी. 30 दिन से एक वर्ष तक के विलंबित शुल्क के साह पहले की तरह जिला रजिस्ट्रार की लिखित अनुमति आवश्यक होगी. जिन मामलों में जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष के बाद दी जाती थी, उनमें पहले जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट आदेश देते थे. अब इसमें केवल यह बदलाव किया गया है कि दो वर्ष से अधिक की देरी होने पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा.

राय ने कहा, कांग्रेस को हमारी यह नीति समझ में नहीं आती. क्या वे चाहते हैं कि कहीं और जन्म लेने वाले बच्चे को मौका देखकर भारत में पंजीकरण करा दिया जाए. इस देश के कुछ राज्यों की सरकारें पहले से ही जन्म प्रमाणपत्र देने के लिए तैयार बैठी रहती थीं. अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा. यह कानून ईमानदार लोगों के लिए व्यवस्था को और सरल बनाता है. पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है. देशभर में साढ़े तीन लाख से अधिक पंजीकरण केंद्र स्थापित किए गए हैं.

उन्होंने कहा, मैं बताना चाहता हूं कि 1986 में जन्म पंजीकरण का स्तर केवल 31.6 प्रतिशत था. यह बढ़कर 2023 में 99 प्रतिशत से अधिक हो गया है. इसी तरह मृत्यु पंजीकरण 1974 में 72 प्रतिशत था, जो बढ़कर 99.4 प्रतिशत हो गया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण की व्यवस्था में देश के लोगों के साथ बहुत बड़ा धोखा किया. जब मृत्यु पंजीकरण केवल 72 प्रतिशत था, तब लाखों लोगों का रिकॉर्ड ही नहीं बन पाता था. आज यह आंकड़ा बढ़कर 99.4 प्रतिशत तक पहुंच चुका है.

जीसीबी/डीएससी