एएसटीपीएल और संस्थापक पर सेबी का बड़ा एक्शन, 546 करोड़ रुपए रिफंड के साथ 11.5 करोड़ रुपए का लगाया जुर्माना

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर . सेबी यानी पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) ने अवधूत साठे ट्रेडिंग एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड (एएसटीपीएल) और इसके संस्थापक अवधूत साठे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए निवेशकों और प्रतिभागियों से जुटाए गए 546.17 करोड़ रुपए लौटाने का आदेश दिया है. सेबी ने पाया कि कंपनी और उसके संस्थापक बिना आवश्यक पंजीकरण के निवेश सलाहकार और रिसर्च एनालिस्ट से जुड़ी गतिविधियां संचालित कर रहे थे.

अपने अंतिम आदेश में सेबी ने अवधूत साठे और उनकी कंपनी को प्रतिभूति बाजार से दो वर्षों के लिए या रिफंड संबंधी निर्देशों का पालन होने तक, जो भी अधिक हो, प्रतिबंधित कर दिया है. वहीं कंपनी के निदेशक अवधूत साठे को छह महीने के लिए बाजार से दूर रहने का आदेश दिया गया है.

सेबी ने निर्देश दिया है कि कंपनी और अवधूत साठे आदेश प्राप्त होने के पांच महीने के भीतर पूरी 546.17 करोड़ रुपए की राशि एक विशेष बैंक खाते में जमा करें. इसके साथ ही उन्हें 30 दिनों के भीतर अंग्रेजी, हिंदी और एक व्यापक रूप से प्रसारित स्थानीय भाषा के समाचार पत्र में विज्ञापन प्रकाशित कर निवेशकों को रिफंड प्रक्रिया की जानकारी देनी होगी.

नियामक ने स्पष्ट किया है कि निवेशकों को धनवापसी केवल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर या अन्य बैंकिंग माध्यमों से की जाएगी, ताकि भुगतान का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहे और लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित की जा सके.

यदि सभी दावेदारों को भुगतान के बाद कोई राशि बचती है, तो उसे सेबी को सौंपना होगा. यह राशि एक वर्ष तक एस्क्रो खाते में रखी जाएगी, ताकि पात्र निवेशकों और शिकायतकर्ताओं को भुगतान किया जा सके. इसके बाद भी यदि धन शेष रहता है तो उसे निवेशक संरक्षण एवं शिक्षा कोष (आईपीईएफ) में स्थानांतरित कर दिया जाएगा.

सेबी ने कंपनी, अवधूत साठे और गौरी साठे पर कुल 11.5 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया है. इसमें कंपनी पर 6 करोड़ रुपए, अवधूत साठे पर 4 करोड़ रुपए और गौरी साठे पर 1.5 करोड़ रुपए का दंड शामिल है. यह राशि आदेश प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर जमा करनी होगी.

सेबी ने अपने आदेश में कहा है कि जब तक पूरी राशि जमा नहीं की जाती, तब तक संबंधित पक्षों के बैंक खातों से डेबिट लेनदेन पर रोक रहेगी.

यह कार्रवाई सेबी की जांच के बाद की गई, जिसमें पाया गया कि एएसटीपीएल और उसके संस्थापक केवल शेयर बाजार की शिक्षा देने तक सीमित नहीं थे, बल्कि निवेशकों को विशिष्ट शेयरों में खरीद और बिक्री की सलाह भी दे रहे थे. जांच में सामने आया कि कंपनी कथित तौर पर एंट्री और एग्जिट स्तर, स्टॉप लॉस और शेयरों की कीमतों की दिशा से जुड़े सुझाव दे रही थी, जबकि इसके लिए आवश्यक नियामकीय पंजीकरण उसके पास नहीं था.

सेबी ने यह भी पाया कि कंपनी अपने प्रचार सामग्री में चुनिंदा लाभदायक सौदों को प्रमुखता से दिखा रही थी और प्रतिभागियों को ऊंचे रिटर्न का दावा कर आकर्षित कर रही थी. मार्च 2024 में प्रशासनिक चेतावनी मिलने के बाद भी इन गतिविधियों में बदलाव नहीं किया गया, जिसके बाद नियामक ने सख्त कार्रवाई का फैसला लिया.

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डीबीपी